कुछ दिन के लिए में प्रवास पर रहूँगा। वहा मौका मिला तो कुछ चीजे पोस्ट करूंगा, फिलहाल पेश है दो और ग़ज़ले। चाहने वालो का स्नेह मिलेगा ही, यह भरोसा है। तो अर्ज किया है कि-
ग़ज़ल
साथ आओगे तो मुझको हौसला मिल जाएगा
साँस लेने का समझ लो सिलसिला बन जाएगा
यूं अकेला भी चलूँ तो कौन रोकेगा मुझे
तुम रहोगे साथ तो ये रास्ता कट जाएगा
थे बहुत छोटे तो सारे भाई-बन्धु एक थे
क्या पता था के बड़े होंगे तो घर बंट जाएगा
आपके होने का दम जो लोग भरते है यहाँ
आने दो कोई मुसीबत सब पता चल जाएगा
प्यार दे कर जीत लो इस ज़िंदगी की जंग को
हो कोई दुश्मन तुम्हारे रंग में ढल जाएगा
२
मै जो देखू तुम्हे मुसकराया करो
यूं अंधेरे मे दीपक जलाया करो
रूठना तो अदा है तुम्हारी प्रिये
पर मनाऊँ तो फ़िर मान जाया करो
लौटने की कभी बात करना नही
जिस घड़ी तुम मेरे पास आया करो
हर कली तेरे आने से खिल जाएगी
फूल तुम इस अदा से खिलाया करो
गीत जीवन का हरदम ये सुर में रहे
तुम इसे संग मेरे ही गाया करो
हाथ केवल उठे तो दुआ के लिए
तुम किसी पर इसे न उठाया करो
दिल किसी का कभी मत दुखाया करो
पुन्य को पुन्य कर के कमाया करो
दिल में रहता प्रभू तुम इसे जान लो
अपने दिल में सभी को बिठाया करो
-गिरीश पंकज
स्वागत है बड़े भाई. आपको इस ब्लाग जगत में देखकर अच्छा लगा. मेरे ब्लाग के फालोवर लिस्ट में आपका चित्र देखते ही मुझे आपकी रचना 'डेड बाड़ी' याद आ गई थी.
ReplyDeleteआपका सृजनशील मानस इस यात्रा में भी पूर्ण सक्रिय होगा.
विलम्ब से यहां आने के लिए क्षमा करेंगे गिरीशजी। बहुत अधिक व्यस्तता के चलते उदयप्रकाश जी वाली पोस्ट पर आपकी पहली टिप्पणी को अव्वल तो देर से देख पाया। बाद में फिर उलझ गया। मगर आपको मैने टैग कर रखा था सो आज जवाब दे रहा हूं।
ReplyDeleteआप शब्दों का सफर पर आए, बहुत अच्छा लगा। आपके नाम से बहुत वर्षों से वाकिफ हूं। आपके बालगीतों का ब्लाग भी देखा। बहुत सुंदर बालगीत वहां संजोए हैं। उसे किसी ब्लागएग्रीगेटर पर रजिस्टर कराएं ताकि उनका आनंद पूरा हिन्दीजगत ले सके।
यहां पेश दोनों गीत बेहद सुंदर हैं।
साभार, अजित
Bahut hi sundar aur bhaavpoorn abhivyakti .. man ko chooti hui gazal. Meri badhai sweekar kijiyenga.
ReplyDeleteDhanywad.
Vijay
Please read my new poem “ jheel “ on my blog : http://poemsofvijay.blogspot.com/
behatareen girish ji,
ReplyDeletedonon gazlen lajawaab,badhaai sweekaren.