Thursday, September 3, 2009


एक नई ग़ज़ल
  • लड़कियाँ
सुंदर कोमल कली लडकियां
होती अक्सर भली लडकियां
कितना मीठा मन रखती है
ज्यो मिसरी की डली लडकियां
मत बांधो पैरो में बंधन
अन्तरिक्ष को चली लडकियां
पीडाओं को सह लेती है
संघर्षो में पली लडकियां
लड़के जब नाकारा निकले
माँ-बाप को फली लडकियां
गिरी हुई दुनिया दिखलाती
ससुरालो में जली लडकियां
गिरीश पंकज


1 comment:

  1. बहुत सुन्‍दर. अंतिम पंक्तियों में सारा सच मुखरित है. आभार बड़े भाई.

    ReplyDelete