
ऐसा सुंदर गाँव बनाएं...
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ऐसा सुंदर गाँव बनाएँ,
धरती पर हम स्वर्ग बसाएं ।।
हरा-भरा हो गाँव हमारा,
परिपूरित खलिहान रहे।
मिल-जुल कर रहते हों सारे,
नफ़रत का ना काम रहे।
मन में मैल न जमने पाए,
दूर ह्रदय से पाप भगाएँ।।....
भूत-प्रेत या जादू-टोना,
इसको दूर भागना है।
कर्म हमारी सच्ची पूजा,
जन-जन को समझाना है।
पढ़ा-लिखा हो गाँव हमारा,
जो सोते है, उन्हें जगाएँ।।....
नही किसी पर शक हम पालें,
हो सब पर विश्वास।
दलितों से भी भाई -चारा,
रखें सभी जन खास।
छोटी-मोटी गलती भूलें,
सबको अपने गले लगाएँ।।
आज शपथ हम लेते हैं यह,
गाँव-गाँव तक जाएँगे।
गाँव हमारा आगे आए,
सबको यह समझाएँगे।
पगडण्डी पर चलते हैं पर
अब तो अंतर्जाल बिछाएं।।
ऐसा सुंदर गाँव बनाएँ,
धरती पर हम स्वर्ग बसाएं ।।
गिरीश पंकज
बढ़िया सपना-बढ़िया रचना!!
ReplyDeleteबहुत अच्छा सन्देश देती रचना
ReplyDeleteबहुत सुन्दर सन्देश --- बहुत सुन्दर कविता
ReplyDeleteऐसा सुंदर गाँव बनाएँ,
धरती पर हम स्वर्ग बसाएं ।।
bahut sunder geet badhaai.
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