एक जून... सुधी पाठक अनुमान लगा सकें तो लगा लें, मगर मैं बताऊंगा नही, कि आज के दिन क्या हुआ था. बस इतना ही कहूंगा कि, ज़िंदगी की राह पर अच्छा-खासा अकेला चला जा रहा था, कि कोई और साथ आ गया और बोला, ''अकेले-अकेले कहाँ जा रहे हो/ हमें साथ ले लो, जहाँ जा रहे हो'' लेकिन हम रुके नहीं, तो वह फिर मीठी आवाज में बोल पडा-'' बाबूजी धीरे चलना, प्यार में ज़रा संभालना'' हम फिर भी नहीं रुके मगर उसने हार नहीं मानी और कहा-''जाइये आप कहाँ जायेंगे, ये नज़र लौट के फिर आयेगी. और...आखिर नज़र को लौटना ही पडा. हमने भी कहा- ''तुमने पुकारा और हम चले आये.'' नज़रे चार हुईं और 'अकेला' राही 'दुकेला' हो गया. वो खूबसूरत तारीख थी एक जून...उसी दिन को याद करते हुए कुछ रोमांटिक शेर पेश कर रहा हूँ अपनी फितरत के बिल्कुल विपरीत. क्या करे आज का दिन ही कुछ ऐसा है.वैसे आज बहुत शादियाँ है और आपको कहीं न कही किसी समारोह में जाना ही होगा. इसलिए अब वक्तव्य समाप्त......ज़्यादा मत सोचिये और समय निकल कर ये छोटी-छोटी ग़ज़ले पढ़ लीजिये.
(१)
तुम आते हो पास बहुत अच्छा लगता है
मिट जाते संत्रास बहुत अच्छा लगता है
जीवन के पतझर से जूझा.. बस तेरी
आँखों का मधुमास बहुत अच्छा लगता है
तुम ऐसी हो नदी कि जिसको पी कर के
बढ़ जाती है प्यास बहुत अच्छा लगता है
तुमने संघर्षों में मेरा साथ दिया है
जीवन आया रास बहुत अच्छा लगता है
मेरी राह तका करते हो तुम अक्सर
मुझको यह अहसास बहुत अच्छा लगता है
साथ हमारा रहे सलामत बस पंकज
हो चाहे बनवास बहुत अच्छा लगता है.
(२)
जाने क्या है बात तुम्हारी आँखों में
कट जाती है रात तुम्हारी आँखों में
तुमको चाहा और भला क्या चाहूँगा
अनगिन है सौगात तुम्हारी आँखों में
दुनिया से हरदम खाया धोखा मैंने
बस सच्चे ज़ज्बात तुम्हारी आँखों में.
तपते मौसम में भी शीतलता पाई
इक रिमझिम बरसात तुम्हारी आँखों में
अन्धकार चहुओर नज़र आये लेकिन
है ''मंजुल'' इक प्रात तुम्हारी आंखों में
गिरीश जी ,
ReplyDeleteजहाँ तक मैं समझी हूँ शादी की सालगिरह है....
बहुत बहुत मुबारक शादी की वर्षगाँठ ...
और दोनों गज़लें तो आपके दिल का आईना हैं....
श्रीमति जी को भी मेरी तरफ से बधाई दीजियेगा
साथ हमारा रहे सलामत बस पंकज
ReplyDeleteहो चाहे बनवास बहुत अच्छा लगता है.
अन्धकार चहुओर नज़र आये लेकिन
है ''मंजुल'' इक प्रात तुम्हारी आंखों में
मुझे लगता है अभी कुछ लाइनें और बढ़ सकती हैं। नहीं क्या? खैर, पंकज जी और गिरीश जी दोनों लोगों से कह रहा हूं कि कभी कभी दूसरों के ब्लॉग पर भी जाया करिए। और हां अगर वाकई शादी की सालगिरह है तो मेरी ओर से बधाई स्वीकार करें।
http://udbhavna.blogspot.com/
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ReplyDeleteदोनों ही ग़ज़लें आपके लेखन का मुरीद बनाती हुई लगीं..
ReplyDeleteदादाजी की तरफ से आपको बहुत-बहुत मुबारकबाद। एक समय हमें भी प्यार हुआ था लेकिन तब वैसा जमाना नहीं था। हमें अपने बेटों से पूछना पड़ता था कि प्यार करें या न करें। अब तो बड़ा बेशर्म जमाना आ चुका है औलादें मां-बाप से पूछती ही नहीं।
ReplyDeleteखैर ये ब्लागजगत है। यहां एक से बढ़कर एक लोग है। आप अच्छी गजलें लिखते हैं.. मुगले आजम के समय मिलते तो जरूर आपकी गजल को हम फिल्म में डलवा देते। खैर अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है मैं अपने छोकरों से कहता हूं कि वे इसका प्रबंध करें। वैसे एक लड़का मेरा जो पापाजी बनकर खो गया है मैं उसकी तलाश में निकला हूं पता चला है कि अमरकंटक में कहीं देखा गया है। वही अमरकंटक जहां गिरीश बिल्लौरे साधु-संतो को गांजा पीते हुए देखने गया था।
badhai badhai aur badhai aapko salgirah ki, post se to yahi pratidhwanit ho raha hai ki shadi ki salgirah hai...
ReplyDeleteगिरीश भैया आपको और भाभी जी वैवाहिक वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं।
ReplyDeleteबस आज एक पार्टी दे, हमें भी बुलाएं और सालगिरह मनाएं, आनंद उठाएं।
वाह जी, शादी की सालगिरह मुबारक हो..हमारी तो पार्टी डायरी में लिख लें..दिसम्बर में अलग से...भौजी के हाथ के बने खाने साथ. तय रहा?
ReplyDeleteजाने क्या है बात तुम्हारी आँखों में
ReplyDeleteकट जाती है रात तुम्हारी आँखों में
-आज तो मौके विशेष पर भाभी को यह पंक्ति गा कर सुना ही दिजिये..हिम्मत करिये, काम आयेगी. :)
आपके लिखने मे है जो बात बहुत अच्छा लगता है
ReplyDeleteदोनो ही गजलें बेहतरीन। गजल के पहले की पंक्तियाँ भी रोचक हैं। बहुत पहले की लिखी निम्न पंक्तियों की याद दिला दी आपने -
ReplyDeleteजब होती चार आँखें, आँखों से होती बातें
आँखों से प्यार होता, आँखों में कटती रातें
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
बेहतरीन ग़ज़ल ....दोनों ही !
ReplyDeleteहमेशा की तरह जानदार, शानदार और जबरदस्त।
ReplyDeleteऊपर दी गई सूचना भी सुखद है आपको बधाई।
आता हूं आइसक्रीम गटकने के लिए।
मेरे ब्लाग पर आपके हंसने के लिए कुछ है।
सभी चाहने वालों को...बधाई देने वाले ब्लागर भाई-बहनों को धन्यवाद..दिल से...
ReplyDeleteगिरीश जी भाई साहब और आदरणीया भाभीजी ,
ReplyDeleteविवाहोत्सव की वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएं !
गर्मी के कारण स्वास्थ्य सही न होने से विलंब से आया हूं , तदर्थ क्षमा चाहूंगा ।
आज रचनाओं पर कुछ भी कहते नहीं बन रहा , मन से यही उच्चरित हो रहा है …शुभकामनाएं , …शुभकामनाएं , …शुभकामनाएं !
पुनः हार्दिक शुभकामनाएं !
waah dono hi rachnaayein lajawaab...aur haan shaadi ki varshgaanth ki badhaiyan
ReplyDeleteशादी की सालगिरह मुबारक हो.
ReplyDeleteवाह वाह जी आंदाज बहुत अच्छा लगा...
ReplyDeleteआप दोनो को हमारी तरफ़ से शादी की वर्ष गांठ की बहुत बहुत बधाई.
कविता बहुत सुंदर लगी
धन्यवाद
varshgaanth ki bahut bahut shubhkamnayen aap ko ..achhi ghazlen hain dono
ReplyDeleteगिरीश जी , आप दोनों को शादी की वर्षगाँठ की ढेरों बधाइयाँ और शुभकामनाएं !!
ReplyDeleteकुडि़यों से चिकने आपके गाल लाल हैं सर और भोली आपकी मूरत है http://pulkitpalak.blogspot.com/2010/06/blog-post.html जूनियर ब्लोगर ऐसोसिएशन को बनने से पहले ही सेलीब्रेट करने की खुशी में नीशू तिवारी सर के दाहिने हाथ मिथिलेश दुबे सर को समर्पित कविता का आनंद लीजिए।
ReplyDeleteसबसे पहले तो आपको ,,बहुत-बहुत बधाई ..आप जीवन में हमेशा खुश रहे ,,ईश्वर से यही दुआ है ,,आपकी दोनों रचनाएं बहुत सुन्दर है ,,,आपके मार्गदर्शन की मुझे आवश्यकता है ...कृपया आप मेरे ब्लॉग पर पधार कर कुछ आशीष और सुझाव दे ...
ReplyDeleteआपने मेरी रचना की प्रशंशा की ..अच्छा लगा ,,,'chhand ko bachanaa zaroori hai.'
ReplyDeleteयह बात मैं समझा नहीं थोड़ा खुलकर बताये ,,,मुझे मार्गदर्शन की आवश्यकता है ,,मैं पूर्णतया त्रुटिहीन लिखना चाहता हूँ ..चाहे छन्दों की सुन्दरता कम हो ,,,,कृपया बताने का कस्ट करे ..मैं आपक आभारी रहूँगा
"दुकेले" होने की बहुत बहुत बधाइयाँ !!
ReplyDeleteबढ़िया लगी आज की पोस्ट !
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ReplyDeleteर दोनों गज़लें तो आपके दिल का आईना हैं.
ReplyDeleteहमेशा की तरह जानदार, शानदार और जबरदस्त
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