यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है,
सच कहने पर मिली सजाएँ, दिल्ली तो बदनाम है.
गोरे हट गए काले आ गए, यह कैसा परिवर्तन है?
कदम-कदम पर देख रहे है, सत्ता का ही नर्तन है.
सत्ता का प्रतिरोध करो तो, लाठी-गोली खाओगे.
भगतसिंह बनने की धुन में, इक दिन मारे जाओगे.
अजब मुल्क की गज़ब कथा यह, अकसर कत्लेआम है...
यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है....
भाषा भी है अंगरेज़ों की, संविधान भी उतरन है.
कैसा है यह देश कि जिसका आयातित-सा चिंतन है.
लोकतंत्र में राजतंत्र के कीटाणु-से दिखते है,
नेता-अफसर मिलकर दोनों मूँग यहाँ पर दलते है.
आम आदमी दर्द बताने में अब तक नाकाम है.
यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है...
आजादी का जश्न मनाने नेता-अफसर आगे है,
हम केवल दर्शक है टुच्चे, कितने बड़े अभागे हैं.
भ्रष्ट यहाँ पर भाषण देते, शोषित पीट रहे ताली,
अगर कभी कुछ बात रखी तो तन जाती है 'दोनाली'.
लगता है इस देश का रक्षक केवल अल्ला-राम है..
यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है...
आजादी को है सलाम पर अब तक लगे अधूरी है.
अभी यहाँ कुर्सी-जनता में, दिखती लम्बी दूरी है.
लोगों का दुःख-दर्द यहाँ पर, सत्ता समझ न पाती है,
मंहगाई, अन्याय देखकर, जनता बस चिल्लाती है.
लोकतंत्र को लूट रहे कुछ, दृश्य बड़ा यह आम है.
यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है...
पता नहीं कब देश में फिर से, गांधी बाबा आएंगे.
देश चलाया कैसे जाता, गुंडों को समझायेंगे.
गायें कटती रोजाना और लोग भी मारे जाते हैं,
बेशर्मी से लोग यहाँ बस, हम पर हुकुम चलाते हैं.
नेताओं की खातिर अपने देश का ट्रेफिक जाम है.
यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है...सच कहने पर मिली सजाएँ, दिल्ली तो बदनाम है.
यह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है....
आप के लेख से सहमत हुं, आप अकेले ही नही आप जेसे ओर भी बहुत से लोग है जो इस सुंदर दिन की बधाई भी दुखी मन से स्वीकार करता है, क्योकि उस की आत्मा उस से पुछती है क्या यही आजादी है? तो गुलामी केसी होगी???
ReplyDeleteयह आजादी कुछ लोगों की, बाकी मुल्क गुलाम है,
ReplyDeleteसच कहने पर मिली सजाएँ, दिल्ली तो बदनाम है.
गोरे हट गए काले आ गए, यह कैसा परिवर्तन है?
कदम-कदम पर देख रहे है, सत्ता का ही नर्तन है.
बहुत खूब !
अंग्रेजों से प्राप्त मुक्ति-पर्व
..मुबारक हो!
समय हो तो एक नज़र यहाँ भी:
आज शहीदों ने तुमको अहले वतन ललकारा : अज़ीमउल्लाह ख़ान जिन्होंने पहला झंडा गीत लिखा http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html
बहुत जबरदस्त और सटीक!
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.
सादर
समीर लाल
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं-----
ReplyDeleteसांस का हर सुमन है वतन के लिए
ReplyDeleteजिन्दगी एक हवन है वतन के लिए
कह गई फ़ांसियों में फ़ंसी गरदने
ये हमारा नमन है वतन के लिए
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
... बेहद प्रसंशनीय रचना !!!
ReplyDelete... स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं !!!
बहुत अच्छी प्रस्तुति ...मन को छू गयी ..
ReplyDeleteस्वंत्रता दिवस की बधाइयां और शुभकामनाएं
बहुत सच लिखा आपने . पहली बार पढा आपको और मुरीद हो गये एस कविता से
ReplyDeleteकड़वा सच ....
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं
आप के गीत से निकला आधुनिक राष्ट्रगान
ReplyDelete-----------------------
देश के रक्षक अल्ला राम
जय सिया राम जय सिया राम
सब गुंडे बदमाश जुटे हैं
भारत की रजधानी में
मनमोहन क्या कर पायेंगे
दिल्ली की परधानी में
बिना वजह ये पगड़ीवाला
मारा गया गुलफाम....
जय सिया राम जय सिया राम
कोढ़ तो पहले से ही था अब
खाज के लक्षन भी प्रकटे
बेइमानों की टोली का
सरदार खड़ा कैसे डट के
लूट मचाने वालों का
आराम हुआ हर्राम ....
जय सिया राम जय सिया राम
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आपको बहुत बहुत बधाई .कृपया हम उन कारणों को न उभरने दें जो परतंत्रता के लिए ज़िम्मेदार है . जय-हिंद
ReplyDeleteवन्दे मातरम!
ReplyDeleteस्वतंत्रता दिवस कि शुभकामनाएं,
जय भारत! जय भारती! जय हिन्द! जय हिन्दी!
एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
ReplyDeleteआपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!