एक सप्ताह बाद फिर एक नई ग़ज़ल के साथ हाज़िर हूँ. देखें, शायद जमे सुधी पाठकों को.
और क्या मिलना था मुझको और क्या मिल जाएगा
तुम चले आओ तो मुझको हौसला मिल जाएगा
खोजता मैं फिर रहा था एक दिन भगवान् को
क्या पता था नैन में तेरे पता मिल जाएगा
बिन तुम्हारे ज़िंदगी ये डगमगाती नाव है
तुम हमारे साथ हो तो नाखुदा मिल जाएगा(नाखुदा: नाविक)
हो गया हूँ गुम मगर मैं जानता हूँ एक दिन
चलते-चलते फिर मेरा वह कारवां मिल जाएगा
ज़िंदगी वैसे तो हर पल है पहाड़ों का सफ़र
साथ गर तेरा मिले तो बस मज़ा मिल जाएगा
प्यार अपनी है इबादत, प्यार है आराधना
तयशुदा है एक दिन मुझको खुदा मिल जाएगा
हर घड़ी मुस्कान का दीपक जला कर तुम रखो
क्या पता किस मोड़ अंधा हादिसा मिल जाएगा
टूट कर बिखरा नहीं मैं जानता हूँ सत्य को
मिल गया कोई बुरा तो इक भला मिल जाएगा
मुझको अपनी खुशनसीबी पर भरोसा है बहुत
फिर मुझे इक रोज कोई आपसा मिल जाएगा
है अनोखा देश इसकी खासियत की क्या कहें
दूध मुश्किल है यहाँ पर मैक़दा मिल जाएगा
यह शहर है हादसों की बदनसीबी है यहाँ
हर कोई पंकज यहाँ तो ग़मज़दा मिल जाएगा
वाह चाचा जी बहुत खूब....ये ग़ज़ल भी बहुत सुंदर...उम्मीद है यात्रा भी बढ़िया रहा होगा?? प्रणाम,..
ReplyDeleteबहुत खूब दद्दा ........
ReplyDeleteयह शहर है हादसों की बदनसीबी है यहाँ
हर कोई पंकज यहाँ तो ग़मज़दा मिल जाएगा
गमजदा तो हम भी है ... पर गज़ल नहीं लिखी जाती
बहुत बढ़िया
ReplyDeleteमुझको अपनी खुशनसीबी पर भरोसा है बहुत
ReplyDeleteफिर मुझे इक रोज कोई आपसा मिल जाएगा
बस आप मिल गए है।
आभार
एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
ReplyDeleteआपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !
टूट कर बिखरा नहीं मैं जानता हूँ सत्य को
ReplyDeleteमिल गया कोई बुरा तो इक भला मिल जाएगा
बहुत अच्छी गज़ल ..
प्यार अपनी है इबादत, प्यार है आराधना
ReplyDeleteतयशुदा है एक दिन मुझको खुदा मिल जाएगा
....bahut sundar...bahut acchhi gajal.
bahut pyari gazal hai, pankaj ji , bahut din baad aaj net par aya aur aapko padhkar ana vasool hogaya. bahut achcha laga. badhaai.
ReplyDeleteहमेशा की तरह शानदार गजल
ReplyDeleteकई दिनों से आपसे बात ही नहीं हो पा रही है
आता हूं जल्द ही
टूट कर बिखरा नहीं मैं जानता हूँ सत्य को
ReplyDeleteमिल गया कोई बुरा तो इक भला मिल जाएगा
यही आशावादिता जीवन के हर संघर्ष को ख़ुशी ख़ुशी झेलने की ताकत देती है ...
उषा की प्रथम किरण सी नया उत्साह लिए बहुत भायी यह ग़ज़ल..!
आइये जिद का लबादा फेंककर आगे बढ़े
ReplyDeleteजिन्दगी को इक नया सा फलसफा मिल जायेगा.
बधाई भाई गिरीश, आप के साथ और भी हैं मुसाफिर इसी राह के.
नाखुदा ,अच्छा प्रयोग,गजलोँ कि क्या तारीफ करुँ ,वो तो खुद ही लाजवाब है
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पूरी की पूरी ग़ज़ल भावविभोर कर देने वाली है..पा र्कुछ शेर प्रभाव छोड़ गए..
ReplyDelete१-टूट कर बिखरा नहीं मैं जानता हूँ सत्य को
मिल गया कोई बुरा तो इक भला मिल जाएगा
२-है अनोखा देश इसकी खासियत की क्या कहें
दूध मुश्किल है यहाँ पर मैक़दा मिल जाएगा