ऐसी एक जवानी लिखना
तुम आँखों में पानी लिखना
दुहराती हैं जिसको सदियाँ
ऐसी कोई कहानी लिखना
इंसां बन कर ही रहना है
खुद को तू मत ज्ञानी लिखना
देख ज़ुल्म को चीख जरा तू
या जीवन बेमानी लिखना
दूजे की गलती देखी है
अपनी भी नादानी लिखना
वो घमंड में क्यों डूबा है
ये जीवन है फानी लिखना
राणा का विष अमृत होगा
मीरा इक दीवानी लिखना
कविता को वो युग लौटेगा
तू कबिरा की बानी लिखना
कलम हमारी है गर पूजा
बातें ना बचकानी लिखना
अगर लिख रहा है तू पावस
टूटी छप्पर-छानी लिखना
लोकतंत्र गर ज़िंदा है तो
न राजा, ना रानी लिखना
जब तक ज़िंदा है तू पंकज
बस चलना है...यानी लिखना
दुहराती हैं जिसको सदियाँ
ReplyDeleteऐसी कोई कहानी लिखना
वह भईया. शानदार ग़ज़ल. प्रणाम.
दूजे की गलती देखी है
ReplyDeleteअपनी भी नादानी लिखना
बहुत बढ़िया रचना गिरीश जी...आभार
अच्छी ग़ज़ल है .....आभार
ReplyDeletehttp://thodamuskurakardekho.blogspot.com/
एक एक शब्द दिल की गहराइयोँ मे बस गया है ।
ReplyDeleteआपकी ये गजल ,गजल नही एक संदेश है उस हर युवा के लिए जो कुछ करना चाहता है ,आप वो इबारत लिख रहे हैँ जिसे हर युग मे दुहराया जाएगा ।
मै भी एक कहानी लिखूँगा
न राजा न रानी लिखूँगा
जो चिख-2 कर पुकारता है वतन,
हर वो जिन्दगानी लिखूँगा ।
जिसे देखकर चलते रहेँ लोग ,ऐसी एक लिक निशानी लिखूँगा ।
इंसां बन कर ही रहना है
ReplyDeleteखुद को तू मत ज्ञानी लिखना
बहुत सुंदर रचना जी धन्यवाद
कलम हमारी है गर पूजा
ReplyDeleteबातें ना बचकानी लिखना
अगर लिख रहा है तू पावस
टूटी छप्पर-छानी लिखना
खूबसूरत गज़ल...सीख देती हुई
हर शेर जबरदस्त!! वाह! मजा आ गया.
ReplyDeleteनया तो क्या लिखोगे 'मजाल',
ReplyDeleteहाँ, पर अपनी जुबानी लिखना.
खूबसूरत गज़ल...सीख देती हुई
ReplyDeletehttp://sanjaykuamr.blogspot.com/
एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
ReplyDeleteआपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !
बहुत ही बेहतरीन रचना!
ReplyDeleteजब तक ज़िंदा है तू पंकज
ReplyDeleteबस चलना है...यानी लिखना ......behatareen ghajal...aabhaar.
gagar me sagar jaisi kawita. sagar me jahaan jaisi kawita aur jahaan me ek alag pahchan kawita. prerak margdarshak kawita
ReplyDeleteजब तक ज़िंदा है तू पंकज
ReplyDeleteबस चलना है...यानी लिखना
जीवन चलने का नाम,
ReplyDeleteचलते रहो सुबह शाम !
रचते रहो नए आयाम !
आपको प्रणाम ! प्रणाम !!
बेहतरीन रचना ! मन प्रसन्न हो गया !
बहुत बहत बधाई .............................
ReplyDeleteउम्दा गजल के लिए गिरीश भैया आभार
खोली नम्बर 36......!