Friday, January 7, 2011

व्यंग्य/ उफ़ ये आम आदमी भी न...

नई दुनिया, रायपुर (७-१-२०११) मे प्रकाशित व्यंग्य 
साहित्यानुरागियों के अवलोकनार्थ..

6 comments:

  1. एक बेहतरीन लेख, और एक अच्छा सा मुद्दा. लेकिन आपके अन्दर हिम्मत नहीं हैं, तभी तो अपने किसी नेता या मंत्री का नाम लेने कि बजाय क ख ग का इस्तेमाल किया हैं.aap ne K KH Ga

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  2. अच्छा व्यंग्य ! बेहतर लेखनी ..बधाई !

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  3. आज के नेताओं की सच्चाई उजागर करती रचना| धन्यवाद|

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  4. अच्छा व्यंग्य है भईया. बधाई.

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  5. मँहगाई पर एक धारदार व्यंग्य....राजनेता का खुराफाती दिमाग़ क्या क्या न सोच लेन्न...आम आदमी ही नही मंहगाई से तो वो खुद को भी परेशान बता रहे है जबकि खुद वो ही मँहगाई बढ़ने के ज़िम्मेदार है..

    जबरदस्त रचना..बहुत बहुत बधाई..प्रणाम

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  6. Aapke vyangya bahut kase huye h. Netao ko ye vyangya jarur chubhenge..

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