व्यंग्यकार की कविताई और व्यंग्यादि
आपका ख़त ...महंगाई डायन को ......अरे वाह
अजी यह महगाई डायन को लिखा पत्र तो बहुत अच्छा लगा, लेकिन यह डायन के जन्म दाता को भी एक पत्र लिख देते तो अच्छा था, बहुत सुंदर पत्र जी, धन्यवाद
सही कहा भाटिया जी ने मंहगाई का क्या कसूर है उसे बुलाने वाले त्क़ाँत्रिक [मंत्रियों] के नाम खत लिखें। आभार।
बहुत ही धारदार व्यंग्य लिखा है पंकज जी आपने।ये पेट्रोल डीज़ल वाले इस मंहगाई डायन के भाई-बंद जैसे लगते हैं।
बेहतरीन व्यंग्य रचना...बिल्कुल सच बात है आज कल हर जगह बस मँहगाई की ही बात हो रही है..और सब परेशान भी सबसे ज़्यादा मँहगाई से ही है..सटीक रचना के लिए हार्दिक बधाई..प्रणाम
शानदार व्यंग्य भैया... सादर...
प्रणाम,नई दुनिया में इस पत्र को पढने का अवसर मिला वाकई इस पत्र की एक पंक्ति भी महंगाई डायन तक पहुँच गयी तो स्थिति शायद कुछ सुधर जाये | मुझ अकिंचन की और से इस प्रभावी एवं सार्थक पोस्ट के लिए बधाई स्वीकार करें |
आपका ख़त ...महंगाई डायन को ......अरे वाह
ReplyDeleteअजी यह महगाई डायन को लिखा पत्र तो बहुत अच्छा लगा, लेकिन यह डायन के जन्म दाता को भी एक पत्र लिख देते तो अच्छा था, बहुत सुंदर पत्र जी, धन्यवाद
ReplyDeleteसही कहा भाटिया जी ने मंहगाई का क्या कसूर है उसे बुलाने वाले त्क़ाँत्रिक [मंत्रियों] के नाम खत लिखें। आभार।
ReplyDeleteबहुत ही धारदार व्यंग्य लिखा है पंकज जी आपने।
ReplyDeleteये पेट्रोल डीज़ल वाले इस मंहगाई डायन के भाई-बंद जैसे लगते हैं।
बेहतरीन व्यंग्य रचना...बिल्कुल सच बात है आज कल हर जगह बस मँहगाई की ही बात हो रही है..और सब परेशान भी सबसे ज़्यादा मँहगाई से ही है..
ReplyDeleteसटीक रचना के लिए हार्दिक बधाई..प्रणाम
शानदार व्यंग्य भैया...
ReplyDeleteसादर...
प्रणाम,
ReplyDeleteनई दुनिया में इस पत्र को पढने का अवसर मिला वाकई इस पत्र की एक पंक्ति भी महंगाई डायन तक पहुँच गयी तो स्थिति शायद कुछ सुधर जाये |
मुझ अकिंचन की और से इस प्रभावी एवं सार्थक पोस्ट के लिए बधाई स्वीकार करें |