जब कभी मचले जवानी
दृश्य को बदले जवानी
लड़खड़ाते हैं सभी पर
जो यहाँ संभले जवानी
आ रहा पीछे बुढ़ापा
आज तू हँस ले जवानी
मानती है बात किसकी
है यही पगले जवानी
है किधर जाना कहो तो
कुछ पड़े पल्ले जवानी
टूट जाये स्वप्न सारे
ऐसे न उछले जवानी
गर न हों संकल्प ऊँचे
हर कदम फिसले जवानी
आग का दरिया रहेगा
फिर अगर निकले जवानी
पेड़ बोता है बुढ़ापा
और फल चख ले जवानी
चल पडी तो चल पडी बस
कब कहाँ दम ले जवानी
इक नया इतिहास गढ़ने
दुःख सभी सह ले जवानी
चल पडी तो चल पडी बस
ReplyDeleteकब कहाँ दम ले जवानी
इक नया इतिहास गढ़ने
दुःख सभी सह ले जवानी
वाह बेहतरीन पंक्ति..और पूरा ग़ज़ल भी लाजवाब है !!
आ रहा पीछे बुढ़ापा
ReplyDeleteआज तू हँस ले जवानी
सरल बयानी में बढ़िया ग़ज़ल .
सलाम
बहुत अच्छी ग़ज़ल है। सुंदर रचना के लिए साधुवाद!
ReplyDeleteआ रहा पीछे बुढ़ापा
ReplyDeleteआज तू हंस ले जवानी !
समय रहते कहाँ सोचते हैं लोग !
सुन्दर रचना !
जवानी में बुढ़ापा कौन याद रखता है ....बाद में सोचते हैं ..
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना, धन्यवाद
ReplyDeleteआ रहा पीछे बुढ़ापा
ReplyDeleteआज तू हँस ले जवानी
वाह क्या बता कही है ..बहुत खूब.
गर न हों संकल्प ऊँचे
ReplyDeleteहर कदम फिसले जवानी
आग का दरिया रहेगा
फिर अगर निकले जवानी
जवानी को अलग-अलग कोणों से निहारती अच्छी ग़ज़ल।
हर शेर एक संदेश का वाहक भी बन गया है।
वाह भैया... बड़ी अनोखी ग़ज़ल है...
ReplyDelete"इक नया इतिहास गढ़ने
दुःख सभी सह ले जवानी"
सचमुच...
सादर....
चल पडी तो चल पडी बस
ReplyDeleteकब कहाँ दम ले जवानी
इक नया इतिहास गढ़ने
दुःख सभी सह ले जवानी.....
बहुत सुन्दर शेर...बहुत सुन्दर ग़ज़ल...
खूबसूरत गज़ल ....
ReplyDeleteजिन्दादिल जवानी.
ReplyDeletesunder gazal
ReplyDeletenai gazal shirshk hai ya gazal se alg koi nai vidha samjh nhin aaya
vaise niymon se yah gazal hi lgi
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