कहा अलविदा और छोड़ संसार अचानक चला गया..
सबके दिल में रहता था वो यार..अचानक चला गया
'ढांक' गाँववाला अपना जब्बार..अचानक चला गया
जब तक ज़िंदा था उसने बस प्यार लुटाया दुनिया को
कैसे अब पाएंगे हम जो प्यार..अचानक चला गया
'कोई गीत उदास नहीं रहते थे उसके पास' कभी
साथ ''तरन्नुम'' को ले कर फनकार..अचानक चला गया
कितना कुछ अब भी रचना था लेकिन अल्ला की मर्जी
कहा अलविदा और छोड़ संसार..अचानक चला गया
पहली बार लगा है दिल को यार किसे हम कहते हैं
तुम क्या रूठे लगता है संसार..अचानक चला गया
क्या छोटे क्या बड़े सभी को गले लगाया था तुमने
सचमुच था वो बहुत बड़ा दिलदार..अचानक चला गया
धर्म और मज़हब से उठ कर इंसानों की बात लिखी
मस्तकलंदर, वो फक्कड़ किरदार..अचानक चला गया
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जब्बार ढाकवाला की नयी कविताओं का एक संग्रह कुछ साल पहले आया था, ''कोई उदास गीत नहीं है उनके पास''. मैंने एक शेर में उसी शीर्षक का जिक्र है, ''कोई गीत उदास नहीं रहते थे उसके पास कभी''
सभी मैनपुरी वासीयों की ओर से श्रध्दासुमन !!
ReplyDeleteविनम्र श्रद्धांजलि
ReplyDeleteआपके मित्र वियोग से हम भी दुखी हैं ... हमारी तरफ से उनके लिए विनम्र श्रद्धांजलि स्वीकार करें !
ReplyDeleteपंकज जी मैने भी सुना बेहद दुखद समाचार ...साहित्य की बहुत बड़ी क्षय....कविट पढ़ कर आँखे नम हो गई...पंकज जी जब्बार जी श्रद्धांजलि !!!
ReplyDeleteहमारी तरफ से उनके लिए विनम्र श्रद्धांजलि स्वीकार करें !
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