कभी-कभी लगता है मन में जीने का क्या मानी है
वही सफल दिखता है जिसका जीवन ही बे-पानी है
हम जीवन भर संघर्षों के पथ पर चलते रहते हैं
और वहीं शातिर लोगों का जीवन सफल कहानी है
मूरख के सर ताज दीखते जय-जयकार करें चमचे
वो अंधियारे में बैठा है जो सचमुच में ज्ञानी है
होगी उसके पास में दौलत, ज्ञान और सुविधाएँ भी
लेकिन वह इंसान नहीं है जो निर्मम-अभिमानी है
खतरों की परवाह नहीं है वैसे भी इस जीवन में
मेरा घर है उस रस्ते पर जो रस्ता तूफानी है
जिनके दिल में दया नहीं है जो पत्थर की संतानें
उनसे करुणा की कुछ आशा करना ही बेमानी है
जाने कब वे मर जाएँगे है इत्ती-सी बात मगर
केवल नादां समझ न पाते बहुत बड़ी हैरानी है
बात अगर झकझोर सके ना लिखना भी क्या लिखना है
कविता तो वह पंकज सच्ची जैसे बहता पानी है
मूरख के सर ताज दीखते जय-जयकार करें चमचे
ReplyDeleteवो अंधियारे में बैठा है जो सचमुच का ज्ञानी है
मन की व्यथा शब्दों में उतर आई है ..अच्छी गज़ल
बात अगर झकझोर सके ना लिखना भी क्या लिखना है
ReplyDeleteअच्छी रचना है -
झकझोर गयी -
बहुत कड़े शब्दों में उतारी है व्यथा .
होगी उसके पास में दौलत, ज्ञान और सुविधाएँ भी
ReplyDeleteलेकिन वह इंसान नहीं है जो निर्मम-अभिमानी है
खतरों की परवाह नहीं है वैसे भी इस जीवन में
मेरा घर है उस रस्ते पर जो रस्ता तूफानी है
सारगर्भित शब्दों का चयन , अच्छा काव्य, बधाई भी ,शुभकामनाएं भी
vyatha ko bahut saargarbhit shabd diye hain
ReplyDeleteचर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 08-03 - 2011
ReplyDeleteको ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..
http://charchamanch.uchcharan.com/
बहुत सुंदर रचना, धन्यवाद
ReplyDeleteउम्दा रचना...
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना| धन्यवाद|
ReplyDeleteम जीवन भर संघर्षों के पथ पर चलते रहते हैं
ReplyDeleteऔर वहीं शातिर लोगों का जीवन सफल कहानी है
होगी उसके पास में दौलत, ज्ञान और सुविधाएँ भी
लेकिन वह इंसान नहीं है जो निर्मम-अभिमानी है
जाने कब वे मर जाएँगे है इत्ती-सी बात मगर
केवल नादां समझ न पाते बहुत बड़ी हैरानी है
हमेशा की तरह शानदार गज़ल हर शेर गज़ब कर रहा है।
जाने कब वे मर जाएँगे है इत्ती-सी बात मगर
ReplyDeleteकेवल नादां समझ न पाते बहुत बड़ी हैरानी है...
बहुत सारगर्भित और शानदार रचना.. अंतिम चार पंक्तियाँ तो लाजवाब हैं....
कभी-कभी लगता है मन में जीने का क्या मानी है
ReplyDeleteवही सफल दिखता है जिसका जीवन ही बे-पानी है
हम जीवन भर संघर्षों के पथ पर चलते रहते हैं
और वहीं शातिर लोगों का जीवन सफल कहानी है
आज की व्यवस्था पर बहुत सटीक टिप्पणी...सभी शेर लाज़वाब..
आदरणीय गिरीश जी सादर नमन
ReplyDeleteएक एक शब्द में अनुभव दिख रहा है
hamesha ki tarah behtareen abhivyakti.
ReplyDeleteसम्मानिय गिरीश जी
ReplyDeleteप्रणाम !
बेहद सुंदर , हर शेर अच्छा है . आनद आया पढ़ !
साधुवाद
सादर
हम जीवन भर संघर्षों के पथ पर चलते रहते हैं
ReplyDeleteऔर वहीं शातिर लोगों का जीवन सफल कहानी है
बेहतरीन पंक्ति...बेहतरीन भावाभिव्यक्ति !!
सादर आभार !!
हम जीवन भर संघर्षों के पथ पर चलते रहते हैं
ReplyDeleteऔर वहीं शातिर लोगों का जीवन सफल कहानी है
बेहतरीन पंक्ति...बेहतरीन भावाभिव्यक्ति !!
सादर आभार !!
जिनके दिल में दया नहीं है जो पत्थर की संतानें
ReplyDeleteउनसे करुणा की कुछ आशा करना ही बेमानी है
पत्थर की संतानें...वाह,
यह प्रतीक एकदम मौलिक है। इस बिम्ब ने शेर को गहरा अर्थ दिया है।
बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल।
शानदार रचना भैया...
ReplyDeleteसादर प्रणाम.