बहुत दिनों के बाद आना हुआ. हो सकता है कि कुछ लोगों के लिए यह सुकून देने वाला भी हो कि बोर करने वाली रचनाओं से तो बच गए. लेकिन हम भी कम नहीं, लीजिये, फिर आ गए हैं, एक नई ग़ज़ल के साथ...
वक़्त जैसा भी है यह संभल जाएगा
अपनी हिम्मत से मौसम बदल जाएगा वक़्त आया तो उसको पकड़ लीजिए
वरना मुट्ठी से अपनी फिसल जायेगा
मुद्दतों बाद आया है दिन प्यार का
देर की तो मुहूरत ये टल जायेगा
चलते चलते चलो रात बीतेगी ये
अपना सूरज वो प्यारा निकल जाएगा
नन्हा बच्चा खिलौने से कुछ कम नहीं
खेलते ही रहो दिल बहल जायेगा
वक़्त आया तो उसको पकड़ लीजिए
ReplyDeleteवरना मुट्ठी से अपनी फिसल जायेगा
सच्ची बात.
नन्हा बच्चा खिलौने से कुछ कम नहीं
ReplyDeleteखेलते ही रहो दिल बहल जायेगा....
बहुत सार्थक सन्देश देती सुन्दर गज़ल..आभार
वक़्त जैसा भी है यह संभल जाएगा
ReplyDeleteअपनी हिम्मत से मौसम बदल जाएगा
बहुत ही सुंदर गज़ल है ।
नन्हा बच्चा खिलौने से कुछ कम नहीं
ReplyDeleteखेलते ही रहो दिल बहल जायेगा |
बहुत सुंदर , सार्थक रचना , बधाई
नन्हा बच्चा खिलौने से कुछ कम नहीं
ReplyDeleteखेलते ही रहो दिल बहल जायेगा
आहा ...बहुत सुकून देने वाला शेर है ये| सुन्दर गज़ल के लिए बधाई|
हिम्मत और धीरज से समय बदल जाता है.
ReplyDeleteवक़्त आया तो उसको पकड़ लीजिए
ReplyDeleteवरना मुट्ठी से अपनी फिसल जायेगा
वाह वाह जी, बहुत सुंदर गजल, धन्यवाद
काफी समय बाद टिप्पणी दे रहाँ हूं ,समय मिलता ही नही आगामी 10 जून से कालेज की छूट्टियां हो जाएंगी तब नियमित टिप्पणी दूंगा ।
ReplyDeleteआपकी ये रचना दिल के पास लगी ।
BHOJPURIKHOJ.COM
बहुत बढ़िया गज़ल:
ReplyDeleteमुद्दतों बाद आया है दिन प्यार का
देर की तो मुहूरत ये टल जायेगा
नन्हा बच्चा खिलौने से कुछ कम नहीं
खेलते ही रहो दिल बहल जायेगा
बहुत ही सुंदर.....
वक़्त आया तो उसको पकड़ लीजिए
ReplyDeleteवरना मुट्ठी से अपनी फिसल जायेगा
मुद्दतों बाद आया है दिन प्यार का
देर की तो मुहूरत ये टल जायेगा
वाह …………हमेशा की तरह शानदार गज़ल्…………सुन्दर शेर्।
व्वाह.... आनंद आ गया भईया, शानदार गाजल पढ़ के....
ReplyDeleteसादर...
गिरीश जी आपकी ग़ज़लों की सबसे बड़ी खासियत ये है के उन्हें पढ़ कर मन में से नकारात्मक सोच का पलायन हो जाता है...ज़िन्दगी जीने की ऊर्जा मिल जाती है...नया जोश आ जाता है...आप बहुत बेहतरीन लिखते हैं...मेरी दिली दाद कबूल करें...
ReplyDeleteनीरज
वक़्त आया तो उसको पकड़ लीजिए
ReplyDeleteवरना मुट्ठी से अपनी फिसल जायेगा
और फिर बीता हुआ समय दुबारा लौट कर नहीं आता। अच्छा संदेश...।
वो जो आये और आ कर फिर अपना बना गए बेहतरीन ग़ज़ल देकर , यूं ही लिखते रहिये, हमें इंतज़ार रहता है
ReplyDeleteबहुत सुंदर ग़ज़ल... बधाई
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