''सद्भावना दर्पण'

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नई ग़ज़ल / मरते नहीं जो लोग वो किरदार था अदम ....

>> Sunday, December 18, 2011

ग़ज़ल की इक धार था, तलवार था अदम
साहित्य की दुनिया में अवतार था अदम

बाहर निकाला हुस्न की चर्चा से गज़ल को
कविता की सही राह या विचार था अदम

जैसा लिखा वैसा ही जिया था बड़ा कमाल
कविता के गले का वो इक हार था अदम

उसकी कमी पूरी कभी भी हो नहीं सकती
सबसे अलग, सबसे जुदा फनकार था अदम

इंसानियत कहते हैं किसे उसने बताया
कविता का नया बिलकुल औजार था अदम

जो ज़िंदगी सच था बेबाक कह दिया
जो दब न सका वो इक अखबार था अदम 

यादों में वो हमेशा ही महकेगा हमारे
मरते नहीं जो लोग वो किरदार था अदम

15 टिप्पणियाँ:

शिवम् मिश्रा December 18, 2011 at 6:22 AM  

कल ही मैंने अपने एक IAS मित्र से बात की थी कि अदम साहब को कुछ सरकारी अनुदान मिल सके तो उनका इलाज बहेतर तरीके से संभव हो सकेगा ... पर इस से पहले कि वो या कोई और कुछ कर पाता ... सब कुछ ख़त्म हो गया !


विनम्र श्रधांजलि ...

Rajesh Kumari December 18, 2011 at 6:24 AM  

bahut bhaavbheeni ghazal adam saahab ke liye bahut umdaa.

संगीता स्वरुप ( गीत ) December 18, 2011 at 10:42 AM  

अदम जी पर खूबसूरत रचना ... उनको विनम्र श्रद्धांजलि

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ December 18, 2011 at 10:47 AM  

आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा आज दिनांक 19-12-2011 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

vandana December 18, 2011 at 4:19 PM  

विनम्र श्रद्धांजलि अदम साहब को

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) December 18, 2011 at 6:27 PM  

अदम गौंडवी को भावभीनी श्रद्धांजलि!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) December 18, 2011 at 7:22 PM  

बाहर निकाला हुस्न की चर्चा से गज़ल को
कविता की सही राह या विचार था अदम

हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि.

veerubhai December 18, 2011 at 11:40 PM  

अदम साहब को दी गई इस काव्यात्मक पुष्पांजलि में हम भी शरीक हैं .रोज़ पैदा नहीं होते अदम .

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " December 18, 2011 at 11:58 PM  

अदम जी को भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि ...
सरल-सहज स्वभाव के , ठेठ देहाती वेश-भूषा कुर्ता,धोती और गमछे में रहने वाले अदम गोंडवी की शायरी एक ज्वालामुखी की तरह है जिसमे बहुत आग है | गाँव-गरीब की संवेदना की संवाहक है उनकी शायरी | उर्दू ग़ज़ल में हिंदी-उर्दू शब्दों का प्रयोग करके और अपने बेबाक लहजे से उन्होंने उर्दू शायरी को एक नया आयाम दिया |

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') December 19, 2011 at 4:36 AM  

आपने बहुत अलग अंदाज में याद किया है भईया अदम साहब को....
बेबाक शायर को सादर श्रद्धांजली....

anju(anu) choudhary December 19, 2011 at 6:47 AM  

कभी जाना नहीं था आपके अदम जी को ....पर आपकी लेखनी द्वारा उन्हें जानने का मौका मिला ...और साथ ही उनके जाने का दुःख भी हुआ ...

Latest Bollywood News December 19, 2011 at 7:21 AM  

Very very Nice post our team like it thanks for sharing

Ashok Bajaj December 19, 2011 at 9:36 AM  

सुन्दर रचना .

Pallavi December 19, 2011 at 12:06 PM  

अदम जी पर लिखी बहुत ही खूबसूरत रचना समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://aapki-pasand.blogspot.com/2011/12/blog-post_19.html

avanti singh December 21, 2011 at 4:34 AM  

बहुत ही अच्छा लिखा है आप ने अदम जी पर .....

सुनिए गिरीश पंकज को

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