''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं..

>> Sunday, August 29, 2021


आ जाओ कन्हैया मेरे, 
आ जा आओ कन्हैया
 संकट में गोपियाँ हैं, 
खतरे में है गैया।। आ जाओ कन्हैया.... 

वो कंस फिर से आया, दानव भी आ गये।
सुख-चैन इस धरा का, उसको ये खा गये। 
इनका करो संहार ओ बलराम के भैया।। 
आ जाओ कन्हैया...... 

लुटती है द्रौपदी यहाँ, हर रोज देश में, 
यह देख कर यशोदा रहती है क्लेश में। 
अब लाज बचाओ तुम्हीं ओ बंशी बजैया।।
 आ जाओ कन्हैया...... 

यमुना हुई है मैली, हैं नाग विषैले। 
कैसे पियेंगे पानी, गोकुल को ये छैले। 
फिर आ के दहो नदिया, ओ नागनथैया।। 
 आ जाओ कन्हैया...... 

संकट में देश देखो, कौरव यहाँ छाए, 
अन्याय बढ़ रहा है, अब कौन बचाए।
 सबको सबक सिखाओ, कहती यही मैया।। 
आ जाओ कन्हैया......

1 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) September 5, 2021 at 12:34 AM  

भावपूर्ण आह्वान ।

सुनिए गिरीश पंकज को

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