''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर :

>> Tuesday, October 11, 2022


सुंदर कोमल कली बेटियाँ
होतीं अकसर भली बेटियाँ

कितना मीठा मन रखती हैं
ज्यों मिश्री की डली बेटियाँ

मत बांधो पैरों में बंधन
अंतरिक्ष को चली बेटियाँ

बेटे जब नाकारा निकले
माँ-बाप को भली बेटियाँ

गिरी हुई दुनिया दिखलातीं
ससुरालों में जली बेटियाँ

सुंदर कोमल कली बेटियाँ...

@ गिरीश पंकज

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