गिरीश पंकज

व्यंग्यकार की कविताई और व्यंग्यादि

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Tuesday, October 27, 2009

साधो यह हिजड़ों का गाँव-1

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व्यंग्य-पद- (1) साधो यह हिजड़ों का गाँव। कोयल चुप है, कौवे हिट हैं, करते काँव-काँव बस काँव। सच कहने से बेहतर है तुम, बैठो जा कर शीतल छा...
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