गिरीश पंकज

व्यंग्यकार की कविताई और व्यंग्यादि

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Saturday, July 17, 2010

नई ग़ज़ल/ छल से छलके नैन हमारे , आज हमारा जगराता है

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हम सबका जीवन विविधताओं से भरा हुआ है. अनुभव, स्थितियां सबके अनेक रंग हैं. दुःख है तो सुख भी है. दुःख आया है तो सुख की संभावना भी बनी हुई है....
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Monday, April 19, 2010

और क्या देंगे सभी को हौसला देते रहें ...

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पांच-छः दिन बाद प्रवास से लौट कर फिर शुभचिंतको के सामने हूँ. होशंगाबाद गया था. वहां पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की पत्रकारिता पर बोलना था. खैर,...
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