गिरीश पंकज
व्यंग्यकार की कविताई और व्यंग्यादि
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होली-गीत
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Saturday, March 19, 2011
इसको होली में लाल करें .......
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आओ कि ज़रा कमाल करें. काला-काला यह जीवन है, इसको होली में लाल करें. आओ कि ज़रा कमाल करें हरदम ही रोनी सूरत है,...
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