इसको होली में लाल करें .......
>> Saturday, March 19, 2011
आओ कि ज़रा कमाल करें.
काला-काला यह जीवन है,
इसको होली में लाल करें.
आओ कि ज़रा कमाल करें हरदम ही रोनी सूरत है,
अब मुस्काना भी याद नहीं?
मानव-शरीर में आये हैं,
पर मानव से संवाद नहीं?
जो अकड़ लिए फिरते उनको,
बातों से तनिक हलाल करें..
आओ कि ज़रा कमाल करें
पल भर का जीवन है प्यारे,
कब साँस कहाँ थम जायेगी.
दो घड़ी प्यार से जी लो तो,
दुनिया तेरे यश गायेगी.
है पास खुशी की दौलत गर
दुनिया को मालामाल करें.
आओ कि ज़रा कमाल करें
यह जीवन है सुन्दर कितना,
उसको गंदा-सा कर डाला.
नफ़रत, हिंसा की कालिख से,
जीवन को कितना भर डाला.
अब वक्त मिला है थोडा-सा,
धो कर के इन्हें निहाल करें...
आओ कि ज़रा कमाल करें
गर भ्रष्ट बहुत रहताजीवन
तकलीफ बहुत सहता जीवन
नंबर दो का है माल बहुत,
बस इसीलिये डरता जीवन.
कुछ दौलत अब बाहर निकले,
कंगालों को खुशहाल करें.
आओ कि ज़रा कमाल करें.....
भीतर में पाप भरा कितना,
बाहर से साफ बने बैठे.
हैं दो कौड़ी के लोग मगर,
फ़ोकट में खूब तने बैठे.
इन सबको लायें धरती पर,
कुछ ऐसा हम भूचाल करें.
आओ कि ज़रा कमाल करें..... आओ कि ज़रा कमाल करें.
काला-काला यह जीवन है,
इसको होली में लाल करें..