''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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गीत...

>> Sunday, October 11, 2009


सुख आया जब मेरे द्वार...

सुख आया जब मेरे द्वार,
मुझे दे गया जीवन-सार।।

सुख बोला- बाहर जो प्यासा,
उसकी प्यास बुझा दे।
भूखा है जो युगों-युगों से,
उसको अन्न खिला दे।
मै तेरा हो जाऊँगा बस,
किया अगर तुमने उपकार॥

सुख बोला-निर्मल-मन रखना,
पीर-पराई पी ले।
अपने लिए पशु जीते तू,
सबकी खातिर जी ले।
बाँट सके तो बाँट जरा तू,
प्यार भरा अपना संसार।।...

सुख कहता- संतोष मेरा धन,
कभी न दौलत चाहूं।
जो धन की परछाईं पकडे,
उसको सदा नचाऊँ ।
पर्मारथपुर गाँव है मेरा,
मानवता मेरा परिवार।। ...

जो हैं वंचित उन सबको तू,
उनका हक़ दिलवाना।
जहाँ अँधेरा दीखे फ़ौरन,
दीपक बन जल जाना।
बन कर तेरा दास रहूँगा,
बढे तेरा सुंदर घर-बार।।

सुख आया जब मेरे द्वार,
मुझे दे गया जीवन-सार।। ....

6 टिप्पणियाँ:

AlbelaKhatri.com October 11, 2009 at 10:01 AM  

गिरीशजी,
आपके गीत ने बहुत प्रभावित किया.........

बहुत ही कोमल, बहुत ही मृदुल और बहुत ही सार्थक इस गीत के लिए आपको लाख लाख बधाइयां.......

ललित शर्मा October 11, 2009 at 10:18 AM  

जो हैं वंचित उन सबको तू,
उनका हक़ दिलवाना।
जहाँ अँधेरा दीखे फ़ौरन,
दीपक बन जल जाना।

बहुत बढि्या गिरीश भैया बधाई

M VERMA October 11, 2009 at 4:41 PM  

जो हैं वंचित उन सबको तू,
उनका हक़ दिलवाना।
जहाँ अँधेरा दीखे फ़ौरन,
दीपक बन जल जाना।
बहुत उत्तम भाव, बेहतरीन

योगेश स्वप्न October 11, 2009 at 5:27 PM  

behatareen rachna. badhaai.

Nirmla Kapila October 11, 2009 at 10:20 PM  

जो हैं वंचित उन सबको तू,
उनका हक़ दिलवाना।
जहाँ अँधेरा दीखे फ़ौरन,
दीपक बन जल जाना।
बन कर तेरा दास रहूँगा,
बढे तेरा सुंदर घर-बार।।

सुख आया जब मेरे द्वार,
मुझे दे गया जीवन-सार।। ....
bahu
त सुन्दर प्रेरणा देती कविता के लिये धन्यवाद

नीरज गोस्वामी October 12, 2009 at 4:26 AM  

काश सुख द्वारा दिए इस जीवन सार को हम अपने जीवन में उतार लें...उत्तम रचना...बधाई...
नीरज

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