''सद्भावना दर्पण'

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नई ग़ज़ल / मेरा चन्दा हर पल मेरे, मन-आँगन में खिलता है.

>> Friday, October 14, 2011

आज 'करवाचौथ' है. कुछ पंक्तियाँ उन के लिये जो इस दिन को मनाती हैं, और जिनका हर दिन पति के लिये ही समर्पित होता है

सुंदर-शीतल चन्दा सबका,
नीलगगन  में रहता है
मेरा चन्दा हर पल मेरे,

मन-आँगन में खिलता है.

बना रहे वह रौशन हरदम,

यही गुज़ारिश है भगवन.
जन्म-जन्म का साथ बड़े ही,

पुण्य-भाग से मिलता है..

सुख-दुःख तो आते रहते हैं,

लेकिन जब हो साथ प्रिये,
जीवन का हर रंग मुझे तो,

इक जैसा ही लगता है...

हर दिन करवाचौथ हमारा,

हर दिन चन्दा के दर्शन.
याद तुम्हारी कर के मेरा,

तन-मन सदा महकता है...

सुंदर-शीतल चन्दा सबका,

नीलगगन  में रहता है.
मेरा चन्दा हर पल मेरे,

मन-आँगन में खिलता है

9 टिप्पणियाँ:

सतीश सक्सेना October 14, 2011 at 11:37 PM  

बड़ा प्यारा स्नेह गीत लिखा है भाई जी !
शुभकामनायें !

वन्दना October 15, 2011 at 3:08 AM  

बहुत ही प्यारा गीत लिखा है ……………मन के तारो को झंकृत कर गया।

Pallavi October 15, 2011 at 3:49 AM  

सच इस शुभ अवसर पर आपकी इस रचना ने मन ख़ुश करदिया। शुभकामनायें

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') October 15, 2011 at 4:29 AM  

बहुत प्यारा गीत है भईया...
आनंद आ गया...
सादर प्रनाम....

shikha varshney October 15, 2011 at 4:49 AM  

बहुत सुन्दर गीत आज के दिन तो चंदा सबसे प्यारा लगता है.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" October 15, 2011 at 5:50 AM  

sneh me doobi sneh geet ke snehil panktiyan...sadar badhayee ke sath

ana October 15, 2011 at 7:13 AM  

karwachauth ki shubhakamnaaye

संगीता स्वरुप ( गीत ) October 15, 2011 at 10:17 PM  

बहुत सुन्दर भाव से रचा गीत

सागर October 16, 2011 at 11:07 PM  

khubsurat bhaavo ko saji rachna...

सुनिए गिरीश पंकज को

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