''सद्भावना दर्पण'

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नई ग़ज़ल / जो झुकता है बड़े अदब से सचमुच वो इनसान बड़ा है..

>> Tuesday, December 13, 2011

जिसे सीखने की है ख्वाहिश इक दिन वो परवान चढ़ा है
जो झुकता है बड़े अदब से सचमुच वो इनसान बड़ा है

जो बेमतलब तने रहेंगे इक दिन टूटेंगे आखिर

वही गिरा है बीच राह में बेतलब जो यहाँ अड़ा है

प्यार-मोहब्बत बाँटो सबको लेकिन ज़्यादा ज्ञान न दो

वही छलकता है कुछ ज्यादा खाली-खाली अगर घडा है


पत्थर था वो छेनी खा कर आज देवता बन बैठा
जो बचता है बेचारा वो धूल फाँकता दूर पडा है

कौन भला उसको रोकेगा उसकी जीत तो निश्चित है

दुनिया से पहले वो खुद से रोज़ाना ही खूब लड़ा है

अपनी झूठी शान में आ कर हमने देखा है पंकज

बरसों पहले जहाँ खडा था बंदा आखिर वहीं खडा है

16 टिप्पणियाँ:

कुश्वंश December 13, 2011 at 5:43 AM  

वाह बेहद खूबसूरत ग़ज़ल, अभिवादन गिरीश जी

ana December 13, 2011 at 7:16 AM  

bahut hi badhiya gazal....abhar

मुकेश कुमार यादव December 13, 2011 at 7:25 AM  

आदरणीय ,गिरीश पंकज सर जी!

आज इस गजल को मैने पढा और कल मै काँलेज मे अपने दोस्तो को भी पढने के लिये कहूंगा ,एक ऐसी रचना जो झकझोरती है , एक ऐसी गजल और लिखीये जो लोगे या विद्यार्थी जो निराश हो जाते हैँ उनका उत्साह वर्धन करे ।

आपका अपना
मुकेश यादव
रुङकी

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') December 13, 2011 at 7:33 AM  

जो झुकता है बड़े अदब से सचमुच वो इनसान बड़ा है....
वाह! भईया.... कितना खुबसूरत ग़ज़ल है....
सादर प्रणाम...

Pallavi December 13, 2011 at 8:06 AM  

पत्थर था वो छेनी खा कर आज देवता बन बैठा
जो बचता है बेचारा वो धूल फाँकता दूर पडा है
वाह क्या बात है अंकल बहुत खूबसूरत एवं सार्थक अभिव्यक्ति समय मिले कभी तो आयेगा मेरे दोनों ब्लोगस पर
http://mhare-anubhav.blogspot.com/ और दूसरा है
http://aapki-pasand.blogspot.com/
दोनों पर आपका हार्दिक स्वागत है

vivek kumar December 13, 2011 at 8:44 AM  

har vyakti ko is ghazal ko padhne ka mouka mile...
bahut khub, sir ji...

veerubhai December 13, 2011 at 10:34 AM  

बेहतरीन ग़ज़ल .हर अशआर काबिले दाद खूबसूरत अर्थ पूर्ण सीख देता सच बोलता .

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) December 13, 2011 at 8:20 PM  

हर शेर बेहतरीन...बढ़िया गज़ल...

Raj December 13, 2011 at 10:10 PM  

bahut khubsurat gazal likhi hai aur badi khubsurat baatein kahi hai.

शारदा अरोरा December 13, 2011 at 10:23 PM  

behtareen ...

arbind ankur December 14, 2011 at 3:55 AM  

bahut sundar ghazal, badhaee.
arvind ankur

Prakash Jain December 14, 2011 at 6:17 AM  

Bahut sundar evam satik bhavon se bhari sachhchai kehti gazal...

www.poeticprakash.com

mere vichar December 14, 2011 at 7:24 AM  

अच्छी लगी.

महेन्द्र मिश्र December 14, 2011 at 10:14 PM  

badhiya prastuti...abhaar

शारदा अरोरा April 9, 2012 at 1:24 AM  

badhiya lagi gazal

Rajesh Yadav September 10, 2013 at 11:26 PM  


बहुत अच्छी रचना ! बधाई स्वीकार करें !

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