''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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नए साल का गीत / सबसे बेहतर यह साल रहे....

>> Wednesday, January 1, 2014

वो जैसा भी था चला गया, अब जो आये खुशहाल रहे,
बस यही दुआ हम करते हैं , सबसे बेहतर यह साल रहे ।।

बदले मन हर इक पापी का, ये बलात्कार अब रुक जाये
क्यों तने रहें हम अपनों से, ये सर थोड़ा-सा झुक जाये
ये दिल अपना घर पावन हो, क्यों जीवन में जंजाल रहे.
बस यही दुआ हम करते हैं सबसे बेहतर यह साल रहे।।

न धोखा दे कोई हमको, ना झूठे वादे करें कभी .
हम सच की राह पे चलें सदा, जुल्मी से क्यों कर डरें कभी,
सबके हिस्से में हो थाली, हर इक जन मालामाल रहे.
बस यही दुआ हम करते हैं, सबसे बेहतर यह साल रहे।

जो अपने सेवक हैं उनको, सेवा का कुछ तो फन आये
उनके जीवन में सच्चाई, थोड़ा-सा अपनापन आये.
ये लोग रहें सच्चे मन से, ।क्यों कर कोई नक्काल रहे
बस यही दुआ हम करते हैं सबसे बेहतर यह साल रहे।

दुनिया में प्रेम रहे ज़िंदा, नफ़रत की कोई ना धारा हो,
ये देश हमे प्यारा लेकिन सारा संसार हमारा हो.
हम विश्व नागरिक बन जाएँ, ऐसा कुछ अरे कमाल रहे।
बस यही दुआ हम करते हैं सबसे बेहतर यह साल रहे.

हम सही राह के राही हों , सबको नव राह दिखाएंगे ,
जो भटक रहे है उन सबको, हम बार-बार समझायेंगे।
जीवन हो इक सीधा रस्ता, क्यों अपनी टेढ़ी चाल रहे।
बस यही दुआ हम करते हैं सबसे बेहतर यह साल रहे।

7 टिप्पणियाँ:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया January 1, 2014 at 10:11 AM  

बहुत सुंदर प्रस्तुति...!
नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाए
RECENT POST -: नये साल का पहला दिन.

वाणी गीत January 1, 2014 at 8:40 PM  

सबसे बेहतर ये साल रहे , यही दुआ सबसे बड़ी शुभकामना !
नव वर्ष की बहुत शुभकामनाएं !

Majaal January 1, 2014 at 8:58 PM  

आमीन !

लिखते रहिये।

sushma 'आहुति' January 1, 2014 at 11:25 PM  

खुबसूरत अभिवयक्ति.....

Amrita Tanmay January 2, 2014 at 12:17 AM  

हार्दिक शुभकामनायें...

डॉ. जेन्नी शबनम January 4, 2014 at 6:31 AM  

बहुत सुन्दर मंगलकामना गीत...

दुनिया में प्रेम रहे ज़िंदा, नफ़रत की कोई ना धारा हो,
ये देश हमे प्यारा लेकिन सारा संसार हमारा हो.

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

अभिषेक कुमार अभी March 29, 2014 at 10:37 AM  

नए साल पे इससे अच्छी बात और दुआ और क्या होगी।
बहुत बहुत ही सुन्दर आदरणीय सर। लाज़वाब लेखनी।
सादर

सुनिए गिरीश पंकज को

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