''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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भजन/मैया कृपा तेरी बरसे।

>> Wednesday, April 6, 2022

मैया कृपा तेरी बरसे।

पाकर के आशीष तुम्हारा,
दुर्बल भी बलवान बने। 
मूरख ज्ञानी बन जाए औ,
निर्धन भी धनवान बने।
दर्शन करके माँ दुर्गे का,
मन भक्तों का नित हरषे। 
मैया कृपा तेरी बरसे।

दुष्टों का संहार करे तू,
भक्तजनों से प्यार करे ।
जो भी तेरी शरण में आया,
उसका बेड़ा पार करे।
बड़ी आस ले कर के मैया
हम निकले अपने घर से।
मैया कृपा तेरी बरसे।

अष्टभुजा वाली ओ माता,
तुझको शीश नवाते हैं।
जिस पर तेरी कृपा हो गई,
वे सब मुक्ति पाते हैं।
बिगड़े काज सभी बन जाते ,
नाम तेरा लेने भर से।।
मैया कृपा तेरी बरसे।

@ गिरीश पंकज

कुछ मित्रों के आग्रह पर लिखा गया भजन।

2 टिप्पणियाँ:

अनीता सैनी April 6, 2022 at 10:00 AM  

जी नमस्ते ,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(०७-०४ -२०२२ ) को
'नेह का बिरुआ'(चर्चा अंक-४३९३)
पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर

Jyoti Dehliwal April 6, 2022 at 8:53 PM  

बहुत सुंदर।

सुनिए गिरीश पंकज को

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