''सद्भावना दर्पण'

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गीत/ मछली भूखी फँसी जाल में ...

>> Thursday, June 16, 2022


मछली भूखी फँसी जाल में...

पानी उसका रहा ठिकाना।
मगर चाहती थी वह दाना ।
तभी जाल के संग मछेरा,
ले आया थोड़ा-सा खाना ।
दौड़ पड़ी पाने को फिर वह,
बिन सोचे बस हर हाल में ।
मछली भूखी फँसी जाल में।।

दाने के लालच में कट गई।
बाकी की फिर छाती फट गई ।
समझदार थी नन्हीं मछली, 
वह जाल से फौरन हट गई ।
नीचे तिरती रही ताल में ।
भूखी मछली फँसी जाल में।।

मछली हम को सबक सिखाए।
लालच में ना कोई आए।
बुरी बला है यह तो सचमुच,
जो फँसता है वह पछताए ।
समझदार क्यों फँसे कहीं भी,
 रहता है वह इसी ख्याल में।

भूखी मछली फँसी जाल में।।

गिरीश पंकज

1 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) June 17, 2022 at 6:40 AM  

बहुत सुंदर और संदेशात्मक बाल रचना ।।

सुनिए गिरीश पंकज को

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