''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

गीत/ जब भी सुख के पीछे भागा...

>> Wednesday, October 14, 2009

 जब भी सुख के पीछे भागा......
जब भी सुख के पीछे भागा,
सुख पाने से दूर हो गया.
इक अंधी ख्वाहिश के कारण,
थक कर के मन चूर हो गया..

जितना मुझको मिल पाया है,
प्रभु की प्रेम-प्रसादी है.
वैसे तो यह पूरा जीवन,
भिक्षुक है, फरियादी है.
जिसने हाथ नहीं फैलाए,
वो ही प्रभु का नूर हो गया..

दुःख में भी रहने का सुख है,
सुख के अन्दर में भी दुःख है.
सच पूछो तो बड़ा कठिन है,
किसको दुःख है, किसको सुख है.
जो यह सत्य समझ पाया वह,
हर सुख से भरपूर हो गया...

अपने सुख को बाँट दिया तो,
कई गुना बढ़ कर आया है.
अजब फलसफा है जीवन का,
इसको कौन समझ पाया है.
सच्चे दानी के घर सुख को,
बस रहना मंज़ूर हो गया..

जीवन अग्नि-परीक्षा इसमे,
रोजाना ही तपना है.
जिसमे जितना तेज़ उसी को,
समझो उतना खपाना है.
तपने-खपने वाला ही तो,
दुनिया में मशहूर हो गया..
गिरीश पंकज

2 टिप्पणियाँ:

योगेश स्वप्न October 15, 2009 at 6:56 AM  

bahut khoob..........behatareen.........excellent.
lajawaab,........ badhaai.........deepawali aur dhanteras ki hardik shubhkaamnayen ishwar apke hriday ko adhyatm ke deepak ke prakash se prakashit karen.

योगेश स्वप्न October 16, 2009 at 6:30 PM  

behatareen .............आपको और आपके परिवार को दीपावली की मंगल कामनाएं.

सुनिए गिरीश पंकज को

  © Free Blogger Templates Skyblue by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP