''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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>> Monday, November 2, 2009


साधो यह हिजडों का गाँव-7

व्यंग्य-पद

(20)
सीधे-सादे अब बेचारे।
मंचों पर सम्मानित होते, नैतिकता के सब हत्यारे।
कैसा है यह दौर यहाँ पर, सज्जन फिरते मारे-मारे।
सच्चे पर हँसते अपराधी, वरदी देखे बदन उघारे।
फरज़ी ज्योतिष, झूठे पंडित, दिखला देंगे दिन में तारे।
कैसी स्पर्धा है जिसमें, झूठा जीते, सच्चा हारे।

(21)
पंडिज्जी तुम पूजा कर दो।
मैं बैठूँ धंधे पर अपने, तुम मेरे भावो को स्वर दो।
अच्छा-सा परसाद बना दो, और थाल में उसको धर दो।
मैं तो पाप करूँगा डेली, घर मेरा खुशियों से भर दो।
भगवन है नादान बेचारा, आँखों पर तुम पट्टïी धर दो।
करे तू पूजा, फल मैं पाऊँ, ऐसा ही कुछ सुंदर वर दो।
(22)
अच्छे जन सब दुखी रहेंगे।
बुरे मंच पर ठँस जाएंगे, भले लोग अपमान सहेंगे।
जो हैं पतित, वही हैं पावन, नैतिकता के कलश ढहेंगे।
गंदों की आबादी बढ़ती, अच्छे किसकी छाँह गहेंगे।
सफल वही जो अवसरवादी, धारे के संग मस्त बहेंगे।
सच मत कहना मर जाओगे, अब झूठे ही सत्य कहेंगे ।

4 टिप्पणियाँ:

अजय कुमार झा November 2, 2009 at 9:53 AM  

सारी गजब रही सरकार ..एक दम कमाल ...

लता 'हया' November 2, 2009 at 10:53 AM  

bahut bahut shukria ;
aapne jo comment aur gazal mujhe mail ki hain wo agar mere blog par dein to mujhe khushi hogi.
aapki tannz bhari har rachana ek se badh kar ek hai to ....
AAP KAHAN MUFLIS HAIN HUZUR?

Udan Tashtari November 2, 2009 at 1:54 PM  

साधो साधो!!

योगेश स्वप्न November 3, 2009 at 3:49 AM  

behatareen rachna. wah.

सुनिए गिरीश पंकज को

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