''सद्भावना दर्पण'

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वसंत पर एक काव्यात्मक निबंध..

>> Tuesday, January 19, 2010


वसंत -  एक काव्यात्मक निबंध
वसंत को मै एक महानायक के रूप में देखता हूँ.
जीवन के मधुर गायक के रूप में देखता हूँ.
इसके आगमन से सारी अनुभूतियाँ नवीन हो जाती हैं क्योंकि 
वसंत के जीवन में थके हुए उदास रंगों का कोई काम नहीं है.
वसंत तो वसंत है, इसका और कोई नाम नहीं है. 
वसंत आस्था के न्वोंमेषित रंगों का नाम है
यह सुख की नूतन उड़ान का परम धाम है
वसंत नन्हे बच्चे की किलकारी है. 
सुमनों की  फुलवारी है. 
वसंत खुशियों की सजी थाली है.
वसंत प्रकृति का राग है.
मनुष्य का आदिम अनुराग है.
वसंत सरस्वती की जननी, निराला की जयन्ती है. 
प्रकृति की अमर काव्य-पंक्ति है.  
वसंत उमंगों का अथ है.
प्रसन्नता का रथ है.
वसंत निर्धन का धन है.
वृद्ध का यौवन है.
वसंत निराशा में आशा है.
वसंत क्या है, जीवन की सही परिभाषा है. 
वसंत जब-जब आता है, मुझे चिरनवीन कर देता है.
वसंत अंतस को खुशियों से भर देता है.
वसंत मुझे जीने की तमीज सिखाता है. वसंत नूतन राह दिखता है. 
वसंत दरअसल एक प्रतीक है. प्रकृति की सीख है.
जब मन में हर्ष हो तो वसंत है.
जब चतुर्दिक उत्कर्ष हो तो वसंत है.
जब जीवन में उल्लास हो तो वसंत है
जब कोई अपना प्रिय पास हो तो वसंत है.
जब स्वप्न कोई साकार हो तो वसंत है. जब ह्रदय में अंकुरित प्यार हो तो वसंत है. जब हम किसी को शुभकामनाएँ तो समझो वसंत है. जब किसी की शुभकामनाएँ लें तो समझो वसंत है. 
वसंत एक कोमल  अनुभूति , एक प्यास है
वसंत आस्था है, विश्वास है. 
वसंत प्रकृति का प्रेम-पत्र है.
वसंत प्रकृति का नूतन वस्त्र है. 
वसंत पिपराया परिधान है. वसंत मनुष्य का शाश्वत गान है. मेरे लिए वसंत का अर्थ अंतस में लोकगीत का उमगना है. नव्य-छंद की सर्जना है. वसंत मेरे लिए प्रेरणा का छंद है. प्रकृति प्रदत्त सुगंध है. वसंत अक्षत है, रोली है. वसंत कोकिल की बोली है वसंत जिजीविषा है, प्रत्याशा है. टूटते हुए मानस की चिरनवीन आशा है. वसंत केवल मौसम नहीं, हमारा उत्प्रेरक साथी है. जीवन-तिमिर में जलती हुई बाती है. वसंत दहकता हुआ गीत है. मनवार्जित प्रीत है. वसंत, क्षितिज में गूंजता संगीत है.  वसंत समदर्शी मनमीत है. 
मित्रों, वसंत मुझे अकसर गढ़ता है. क्योंकि उसमे सुगढ़ता है. वसंत प्रकृति की आत्मा को पढ़ता है. वसंत जीने का मन्त्र देता है अंत नहीं, शुरुआत है. जीवन -संध्या में ओसभारी प्रात है. वसंत उत्स है. उत्सव का संकेत है. इसलिए इसका स्वागत है. वसंत एक मगर रूप अनेक है. वसंत पीताम्बरी-प्रकृति की गात पर लिखी हुई पाती है, लेख है. कुल मिला कर कहें तो वसंत अंत नहीं जीवन की अभिनव शुरुआत है. जीवन-संध्या में ओस भरी प्रात है, प्रभात है. वसंत उत्स है. उत्सव का संकेत है.ऋतु के आनंद को महसूसना है. दहकते हुए मौसम में बहकते हुए कुसुमित-मन को समझना है. वसंत हम सब का अंतहीन तराना है. इसे प्रतिपल अपने मन में बसाना है. और इसके साथ जीवन और नित्य-नूतन-गीत गाना है. टूट गए तो पतझर...और उठ गए तो मधुमास है. समझ सकें तो ह्रदय का विश्वास है.  इसलिए वसंत का स्वागत है. कवि-मन की शुभकामना. आपके लिए... इस पूरी सृष्टि के लिए..
चिरनवीन हो जीवन सबका,
खुशियाँ नित्य अनंत हों.
पतझर आए लेकिन जाए,
प्रतिपल नए वसंत हों..

2 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा January 19, 2010 at 8:51 AM  

मोरो ईंहा दु दु झन बसंत हे
एक झन बसंत अऊ दुसर घोंघा बसंत हे।:)

दिव्य नर्मदा divya narmada January 20, 2010 at 7:11 AM  

यहाँ तो बसंत दिग-दिगंत है.

सुनिए गिरीश पंकज को

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