''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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महावीर वचनामृत-१०

>> Monday, February 22, 2010

(87)
केवल मैं ही श्रेष्ठ हूँ, मेरे उच्च विचार।
यह बोध सम्यक नहीं, मिथ्या यह आचार।।

(88)
जन्म, बुढ़ापा, रोग अरु, मरन दुःखों की खान।
दुःख ही दुःख चारों तरफ, केवल ज्ञान निदान।।

(89)
संगति सही न मिल सकी, भटका मैं चिरकाल।
मूढ़मति बन कर रहा, जग-जंगल विकराल।।

(90)
शत्रु से ज्यादा करे, राग-द्वेष नुकसान।
दूर रहे इनसे वही, जो है प्रज्ञावान।

(91)
जाना गर तू चाहता, भवसागर से पार।
तप-संयम की नाव में, हो जा तुरत सवार।।

(92)
जीव भला क्या देव भी, दुःखी रहे यह सत्य।
काम-वासना ग्रस्त जो, उसकी हो यह गत्य ।।

(93)
जब विराग उत्पन्न हो, सब कुछ है निस्सार।
आसक्तों को ही करे, आकर्षित संसार।।

(94)
राग-द्वेष जब मिट गए, हो समता उत्पन्न।
तृष्ना से ऊपर उठे, रहता मनुज प्रसन्न ।।

(95)
भाव-विरक्त हो कर मनुज, शोक-मुक्त हो जात।
जैसे जल में भी रहे, मुक्त कमल के पात।।

(97)
जो सत्कर्मों में उन्हें, करते देव प्रनाम।
संयम-तप ही धर्म है, ये मोक्ष के धाम।।

2 टिप्पणियाँ:

योगेश स्वप्न February 23, 2010 at 7:08 AM  

kya kahut girish ji, anmol vicharon ke saath, ati uttam shabd sinchit dohe. anupam.

संजय भास्कर February 25, 2010 at 9:16 PM  

behtreen,,,,

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