''सद्भावना दर्पण'

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व्यंग्य कविता/ कुत्तों से भी अंगरेजी में बोलते हैं.

>> Monday, September 13, 2010

१४ सितम्बर...हिंदी दिवस...हिंदी का उत्सव... इस पर वर्षों से कुछ न कुछ लिखता ही रहा हूँ. लिखे बिना मन भी तो नहीं मानता. कुछ लिखना शुरू करूंगा तो बात लम्बी हो जायेगी इसलिए अपनी बात कहने के लिये दो कविताएँ प्रस्तुत कर रहा हूँ. 


व्यंग्य कविता

कुछ अंगरेजियत के गुलाम 
हवाओं में ज़हर घोलते है.
अपने अनपढ़ नौकर 
और कुत्तों से भी 
अंगरेजी में बोलते हैं. 
ये गुलाम नस्ल के लोग 
कुछ और
गुल खिलाते हैं
अपने माता-पिता को जीते जी 
''ममी'' और ''डैड'' बतलाते है.
हाय...
ये भारत के माथे की
मिटती हुई बिंदी है
हाँ, ठीक पहचाना...
राष्ट्रभाषा हिंदी है.

व्यंग्य में अपनी बात कहने के बावजूद मैं आस्थावादी हूँ . इसलिए हिन्दी के जयगान की कामना भी करता हूँ. पेश है एक गीत 

हिंदी का जयगान...

गूंजे हिंदी का जयगान.
हिन्दू, मुस्लिम,सिख, ईसाई,
सबको है इस पर अभिमान.

एक राष्ट्रभाषा हो प्यारी,
हिंदी है भारत की आन.
जोड़ रही है हर भाषा को,
हिन्दी है उन्मुक्त वितान.
गूंजे हिंदी का जयगान.

विश्व-ह्रदय में आन समाए,
आज भारती का अभियान...
सहज-सरल उर-बसने वाली, 
यह भाषा है मातृसमान.
गूंजे हिंदी का जयगान....

गूँजेगी घर-घर यह भाषा,
हिंदी है अपनी पहचान.
आज नहीं तो कल महकेगा,
हिन्दी से यह हिन्दुस्तान.
गूंजे हिंदी का जयगान.
 
अंगरेजी का बंधन टूटे.
भारत अपना बने महान.
भारत की हर भाषा उतम,
हर भाषा की अपनी शान.
मगर राष्ट्र का स्वर है सुन्दर,
हिन्दी का ऐसा सम्मान.

गूंजे हिंदी का जयगान.
हिन्दू, मुस्लिम,सिख, ईसाई,
सबको है इस पर अभिमान.

21 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) September 13, 2010 at 9:46 AM  

दोनों रचनाएँ लाजवाब ....व्यंग सटीक है

हिंदी भाषा को नमन ..

राज भाटिय़ा September 13, 2010 at 9:50 AM  

बहुत सुंदर रचनाये,यह गुलाम तो कुत्तो से भी गये गुजरे है जी

अशोक बजाज September 13, 2010 at 10:05 AM  

बहुत ही उत्कृष्ट कविता ,धन्यवाद

कौशल तिवारी 'मयूख' September 13, 2010 at 10:59 PM  

आज नहीं तो कल महकेगा,
हिन्दी से यह हिन्दुस्तान

Bhavesh (भावेश ) September 14, 2010 at 12:05 AM  

दो बहुत बेहतरीन रचनाये. कुत्तों से अंग्रेजी में शायद इसलिए बोलते है ताकि दोनों जानवर एक दूसरे की भाषा समझ सके :) आशा है वो दिन जल्दी ही आये जब इस देश में हिंदी का जयगान गूंजे.

शिक्षामित्र September 14, 2010 at 7:47 AM  

आलेख बहुत पढ़े पर हिंदी पर कविता ज्यादा नज़र नहीं आई। अच्छा लिखा है आपने।

'उदय' September 14, 2010 at 7:50 AM  

... aabhaar ... jay ho !!!

विनोद कुमार पांडेय September 14, 2010 at 11:44 AM  

सच में अपनी मातृभाषा पर हम सबको गर्व होना चाहिए ..बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति ..हिन्दी दिवस की ढेर सारी बधाई..प्रणाम चाचा जी

S.M.HABIB September 15, 2010 at 5:39 AM  

"ये भारत के माथे की
मिटती हुई बिंदी है
हाँ, ठीक पहचाना...
राष्ट्रभाषा हिंदी है. "
दो उच्चकोटि की रचनाओं के लिए बधाई. भईया प्रणाम.

हेमन्‍त वैष्‍णव September 15, 2010 at 7:17 PM  
This comment has been removed by the author.
हेमन्‍त वैष्‍णव September 15, 2010 at 7:23 PM  

आजादी के पहले 150 साल तक जो घालमेल अंग्रेजो ने हिन्‍दी बोलकर हमारी राष्ट्रभाषा हिन्‍दी को बिगाड़ा उसका बदला आज देश के हर लेडिसे और जेन्‍टसो ने अंग्रेजी बोलकर अंग्रेजी का गत बिगाड़ रहे है।

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι September 15, 2010 at 8:18 PM  

पहली कविता छंद मुक्त हो कर भी मुझको ज़ियादा प्रभा्वित की।

महेन्द्र मिश्र September 16, 2010 at 3:50 AM  

बहुत सटीक रचना .... आभार

varun jha September 16, 2010 at 4:59 AM  

गूंजे हिंदी का जयगान

दीपक 'मशाल' September 16, 2010 at 5:28 AM  

दोनों ही रचनाओं ने आपके उच्च स्तर के लेखन को दर्शाया है सर.. आभार

Halke-Fulke September 19, 2010 at 9:17 AM  

NAMASKAR SIR
AAPKE BLOG PAR PAHLI BAR AANE KA AVSAR MILA..DONO KAVITAYEN UTKRISTHA HAIN.....

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष September 19, 2010 at 6:56 PM  

सहज - सरल - सार्थक और असरदार रचनाएं । बधाई आदरणीय ।

सुनील गज्जाणी September 20, 2010 at 1:02 AM  

ये भारत के माथे की
मिटती हुई बिंदी है
हाँ, ठीक पहचाना...
राष्ट्रभाषा हिंदी है.
गिरीश जी
प्रणाम !
सटीक कहा है आप ने , क्षेत्रीय बोली बोलने वाला अपने बच्चे को हिंदी में बाते करना सिखाता है तो हिंदी भासी इंग्लिश में बात करना सिखाता है कितनी अजीब विडंबना है हमारे देश कि . राजनीति कुर्सी के सब करते है मगर भासा के लिए करते नहीं देखा किसी को .
बधाई !
साधुवाद !

Dr Varsha Singh September 20, 2010 at 7:09 AM  

हिंदी का जयगान.....आपकी अभिलाषा सब की अभिलाषा बने, यही कामना है।

Anonymous September 28, 2010 at 3:34 PM  

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Anonymous August 20, 2011 at 9:57 PM  

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