''सद्भावना दर्पण'

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ग़ज़ल / हर शख्स कहे क्या बात कही कुछ ऐसी अपनी बात रहे

>> Wednesday, July 13, 2011

शुभ रात रहे, शुभ प्रात रहे
घायल न कोई जज़्बात रहे

सब रहें प्यार से जीवन में
क्यों घात रहे, प्रतिघात रहे

हर शख्स कहे क्या बात कही
कुछ ऐसी अपनी बात रहे

हम तोड़ें अपनी चुप्पी को
भावों की मधुर बरसात रहे

मंजिल से पहले रुकें नहीं
अपनी ऐसी शुरुआत रहे

यह जीवन अपना हो सुन्दर
इस दुनिया को सौगात रहे

सब एक रहें सब मानुष हैं
क्यों धर्म, जात औ पात रहे

जो अपने हैं उन सब का ही
बस जीवन भर का साथ रहे

जो बिछुड़े हैं मिल जाएँ वे
क्यों  नैनन में बरसात रहे


हों भले काम, उनके पीछे-
अपना भी थोड़ा हाथ रहे

हर च
हरे पर मुस्कान रहे
यूं खुशियों की बारात रहे

बस हमें आपका प्यार मिले
पंकज की इतनी बात रहे

23 टिप्पणियाँ:

Kailash C Sharma July 13, 2011 at 8:19 AM  

सब रहें प्यार से जीवन में
क्यों घात रहे, प्रतिघात रहे

...बहुत सारगर्भित सोच..हरेक शेर बहुत उम्दा..बहुत सुन्दर और प्रेरक गज़ल..

कुश्वंश July 13, 2011 at 8:57 AM  

हर चहरे पर मुस्कान रहे
यूं खुशियों की बारात रहे

बहुत सुन्दर और प्रेरक

S.M.HABIB July 13, 2011 at 9:18 AM  

अति सुन्दर, शिक्षाप्रद गजल भईया....
सादर....

Dr Varsha Singh July 13, 2011 at 9:42 AM  

हम तोड़ें अपनी चुप्पी को
भावों की मधुर बरसात रहे

आपने बहुत सुन्दर शब्दों में अपनी बात कही है। शुभकामनायें।

अरूण साथी July 13, 2011 at 9:48 AM  

sundar

ehsas July 13, 2011 at 10:02 AM  

बहुत सही बात कही है आपने इस गजल के द्वारा। काश ऐसा हो पाता।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) July 13, 2011 at 11:20 AM  

सुंदर संदेश देती हुई प्यारी सी गज़ल.

Vivek Jain July 13, 2011 at 11:39 AM  

बहुत ही अच्छी कामना,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

अनुपमा त्रिपाठी... July 13, 2011 at 5:14 PM  

मंजिल से पहले रुकें नहीं
अपनी ऐसी शुरुआत रहे

hriday sparshi ..sunder ghazal...badhai.

udaya veer singh July 13, 2011 at 7:52 PM  

हर चहरे पर मुस्कान रहे
यूं खुशियों की बारात रहे
क्या बात पंकज जी !खुबसूरत शब्दों में प्रभावशाली रचना प्रवाह ..... बहुत सुन्दर शुक्रिया जी /

Rajesh Kumari July 13, 2011 at 11:06 PM  

Pankaj ji charcha manch ke madhyam se aaj aapke blog ka pata laga.aapki ghazal ko padhkar laga ki aana saarthak raha.bahut prerak behad khoobsurat ghazal padhne ko mili.anusaran kar rahi hoon.ese writer ki har prastuti padhna chahungi.saath hi apne blog par aapko aamantrit karti hoon.

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' July 14, 2011 at 12:21 AM  

हर चहरे पर मुस्कान रहे
यूं खुशियों की बारात रहे


बहुत सुन्दर ग़ज़ल...बधाई

arvind July 14, 2011 at 2:45 AM  

शुभ रात रहे, शुभ प्रात रहे
घायल न कोई जज़्बात रहे

सब रहें प्यार से जीवन में
क्यों घात रहे, प्रतिघात रहे

हर शख्स कहे क्या बात कही
कुछ ऐसी अपनी बात रहे...बहुत सुन्दर ग़ज़ल...

दिगम्बर नासवा July 14, 2011 at 2:57 AM  

लाजवाब गज़ल है .. कमाल के शेर हैं सभी ...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " July 14, 2011 at 4:09 AM  

शुभ और कल्याणकारी भाव की सुन्दर ग़ज़ल..
ईश्वर करे,ऐसा ही हो

Dr (Miss) Sharad Singh July 14, 2011 at 4:51 AM  

सब एक रहें सब मानुष हैं
क्यों धर्म, जात औ पात रहे
जो अपने हैं उन सब का ही
बस जीवन भर का साथ रहे

आस्था और विश्वास से ओतप्रोत सुन्दर ग़ज़ल !

रंजना July 14, 2011 at 6:37 AM  

वाह...वाह...वाह...

आनंद आ गया...

लाजवाब रचना...

Dilbag Virk July 14, 2011 at 8:21 AM  

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच

Vishaal Charchchit July 14, 2011 at 9:15 AM  

अत्यंत शुभकामनामय ग़ज़ल...एवमस्तु !!!

mahendra verma July 15, 2011 at 7:43 AM  

हों भले काम, उनके पीछे
अपना भी थोड़ा हाथ रहे

हर चहरे पर मुस्कान रहे
यूं खुशियों की बारात रहे

प्रेरक पंक्तियां
सीख देती हुईं
संदेश देती हुईं

Amrita Tanmay July 22, 2011 at 6:31 AM  

बहुत अच्छा लिखा है .हाँ! पोस्ट प्रेरणा देती है. धन्यवाद.

संगीता स्वरुप ( गीत ) November 12, 2011 at 5:01 AM  

बहुत खूबसूरत भावों को समेटे हुए अच्छी रचना

अनुपमा पाठक November 12, 2011 at 5:42 AM  

यह जीवन अपना हो सुन्दर
इस दुनिया को सौगात रहे

सुंदर!

सुनिए गिरीश पंकज को

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