''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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बहुत संभल कर 'आना' बिटिया

>> Tuesday, April 10, 2012

बहुत संभल कर 'आना' बिटिया
बिगड़ा इधर ज़माना बिटिया

बहलाने वाले है ढेरों
अपनी राह पे जाना बिटिया

पग-पग पर हैं यहाँ छलावे
मन को मत भरमाना बिटिया

नयी हवा में बह मत जाना
अपनी राह बनाना बिटिया

तुम भी हो कल की निर्माता
सबको यह समझाना बिटिया

दादी-नानी की 'पोटलियाँ'
उसको नहीं गुमाना बिटिया

(ब्लॉगर शिखा वार्ष्णेय  द्वारा अपनी बेटी के जन्मदिन पर लिखी गयी कविता को पढ़ने के बाद)

12 टिप्पणियाँ:

Kailash Sharma April 10, 2012 at 7:26 AM  

बहुत सुन्दर और सार्थक रचना....आभार

Sunil Kumar April 10, 2012 at 9:21 AM  

सुंदर अतिसुन्दर अच्छी लगी, बधाई

S.N SHUKLA April 10, 2012 at 9:24 AM  

सुन्दर सृजन , बेहतरीन भावाभिव्यक्ति.

मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" पर भी पधारें, आभारी होऊंगा .

dheerendra April 10, 2012 at 9:29 AM  

बेहतरीन भाव पुर्ण बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,लाजबाब सीख देती प्रस्तुति,....

RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" April 10, 2012 at 10:00 AM  

bitiyon ke liye behtarin sadesh..unke sadhe kadam hee jamane ke kadam ko saadhne wale hain..sadar badhayee aaur amantran ke sath..aap manendragarh me rahte hain main pendra me rahta hoon..aapse to mulakat bhee sambav hai

परमजीत सिहँ बाली April 10, 2012 at 10:17 AM  

बहुत बेहतरीन रचना है बधाई स्वीकारें।

Pallavi April 10, 2012 at 10:34 AM  

बहुत सुंदर संदेश मयी सार्थक रचना आभार समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

संगीता स्वरुप ( गीत ) April 10, 2012 at 11:31 AM  

नयी हवा में बह मत जाना
अपनी राह बनाना बिटिया

बिटिया को सार्थक संदेश देती सुंदर रचना

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन April 10, 2012 at 5:25 PM  

ह्रदयस्पर्शी रचना, गिरीश जी!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) April 10, 2012 at 7:25 PM  

सुंदर सार्थक सृजन.

सदा April 10, 2012 at 10:13 PM  

नयी हवा में बह मत जाना
अपनी राह बनाना बिटिया
बहुत ही अनुपम भाव संयोजन लिए हुए
उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

dheerendra April 12, 2012 at 1:34 AM  

सुंदर रचना....
MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

सुनिए गिरीश पंकज को

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