''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

>> Sunday, July 22, 2012


अपने चेहरे पे ज्यादा न रीझा करें
ये रहेगा न ऐसा ही सोचा करें

जो मिला है उसी में सदा खुश रहें
ज़िंदगी से कभी हम न रूठा करें


और दौलत की ख्वाहिश रुलाये बहुत
बात सच है इसे हम भी देखा करें 


जो हैं अपने वो नाराज़ न हों कभी
कुछ भी कहते हुए खुद को टोका करें 


सच कहेंगे मगर कुछ नरम भी रहें
खामखा, बेसबब हम ना ऐठा करें


'कल' हमें ये जहाँ याद करता रहे
काम कुछ तो यहाँ 'आज' ऐसा करें 


दूसरों पे तो हँसना सरल है बहुत
खुद के भीतर भी हम कुछ निहारा करें


हारने से कभी बात बनती नहीं
काम दोबार या फिर तिबारा करें 


जिसको समझा है अपना तो भूलें नहीं
वक़्त आए तो बेशक पुकारा करें 


सुख मिलेगा हमें ज़िंदगी का व्हाँ
कुछ घड़ी अपनों के साथ बैठा करें 

10 टिप्पणियाँ:

अजय कुमार झा July 22, 2012 at 10:07 AM  

आपकी नायाब पोस्ट और लेखनी ने हिंदी अंतर्जाल को समृद्ध किया और हमने उसे सहेज़ कर , अपने बुलेटिन के पन्ने का मान बढाया उद्देश्य सिर्फ़ इतना कि पाठक मित्रों तक ज्यादा से ज्यादा पोस्टों का विस्तार हो सके और एक पोस्ट दूसरी पोस्ट से हाथ मिला सके । रविवार का साप्ताहिक महाबुलेटिन लिंक शतक एक्सप्रेस के रूप में आपके बीच आ गया है । टिप्पणी को क्लिक करके आप सीधे बुलेटिन तक पहुंच सकते हैं और अन्य सभी खूबसूरत पोस्टों के सूत्रों तक भी । बहुत बहुत शुभकामनाएं और आभार । शुक्रिया

Pallavi saxena July 24, 2012 at 3:44 AM  

बहुत ही सुंदर एवं सार्थक रचना...

अर्शिया अली July 24, 2012 at 6:11 PM  

बहुत सही शिक्षा दी है आपने।

आभार।

............
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Asha Saxena July 25, 2012 at 6:54 PM  

एक शिक्षाप्रद अच्छी रचना के लिए आभार |
आशा

expression July 25, 2012 at 7:21 PM  

वाह,....
बहुत खूब.

सादर
अनु

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) July 25, 2012 at 7:30 PM  

आज 26/07/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

Amrita Tanmay July 26, 2012 at 1:17 AM  

शब्द-शब्द में बहुत ही सुन्दर बात कहा है आपने..

डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन' July 27, 2012 at 10:42 AM  

मन को छूती पंक्तियाँ... :)

sheetal July 28, 2012 at 6:50 AM  

gyaan aur shiksha se bharpur,
ek khubsurat rachna.
padh kar is tarah rachna har
insaan apne dosh sudhara kare.

Anil Singh September 1, 2012 at 12:21 PM  

behtareen prastuti,badhayee

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