''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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हर आँगन में दीप जले ......

>> Sunday, November 11, 2012

हर आँगन में दीप जले

हर दिन हो सबकी दीवाली,
दीप ध्यान यह रखना तुम

सिर्फ अमीरों के अंगने में,
जा कर के ना जलना तुम।
खुशी एक बेटी है प्यारी
हर घर फूले और फले।।

सबके हिस्से में हो उत्सव,
नहीं रहे कोई निर्धन।
धन की खातिर कोई न तरसे,
धनतेरस में हो 'खन-खन'.
वो सपना साकार रहे जो,
सपना बारम्बार पले।।

कुछ लोगों की दीवाली है,
बाकी का दीवाला क्यों ?
समझ न आये कुछ लोगों का,
अंतर्मन है काला क्यों ?
कसम हमें इस बार अन्धेरा,
झोंपड़ियों को नहीं छले।।

हर आँगन में दीप जले।

6 टिप्पणियाँ:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया November 11, 2012 at 9:16 AM  

बहुत खूबसूरत प्रस्तुति,,,,
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें |

RECENT POST:....आई दिवाली,,,100 वीं पोस्ट,

म्यूजिकल ग्रीटिंग देखने के लिए कलिक करें,

DR. PAWAN K. MISHRA November 11, 2012 at 7:15 PM  

दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

DR. PAWAN K. MISHRA November 11, 2012 at 7:15 PM  

दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

Manu Tyagi November 11, 2012 at 9:16 PM  

बहुत बढिया । आपको दीपावली की शुभकामनायें

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार November 14, 2012 at 7:43 PM  



हर आंगन में दीप जले

हर दिन हो सबकी दीवाली,
दीप ध्यान यह रखना तुम
सिर्फ अमीरों के अंगने में,
जा कर के ना जलना तुम।
खुशी एक बेटी है प्यारी
हर घर फूले और फले


बहुत सुंदर भाईजी गिरीश पंकज जी !

अच्छी रचना है …


बनी रहे त्यौंहारों की ख़ुशियों हमेशा…

ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान

**♥**♥**♥**●राजेन्द्र स्वर्णकार●**♥**♥**♥**
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ

Dr Varsha Singh November 28, 2012 at 12:53 AM  

उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति.....सशक्त रचना......

सुनिए गिरीश पंकज को

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