''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

फिर मुझे धोखा मिला, मैं क्या कहूँ...

>> Monday, January 28, 2013

पेश है उन लोगों का दर्द जो ये सब भोग चुके हैं
--------------------------------------------------------
फिर मुझे धोखा मिला, मैं क्या कहूँ
है यही इक सिलसिला, मैं क्या कहूँ
 
देख ली तेरी वफ़ा मैंने इधर -
ला, जहर मुझको पिला, मैं क्या कहूँ
 
तोड़ कर दिल हँस रहे हैं लोग अब
तू भी आ के दिल जला, मैं क्या कहूँ
 
जान देने की कसम खाई मगर
क्या मिला मुझको सिला, मैं क्या कहूँ
 
'लिस्ट' लम्बी है हमारे दर्द की ,
और कितनों ने ठगा, मैं क्या कहूँ
 
तू न आया तो समझ ले मैं गया,
आ भी जा, बस आ भी जा, मैं क्या कहूँ
 
ये उदासी जान न ले ले कहीं
आ के थोड़ा मुस्करा, मैं क्या कहूँ
 
अब यहाँ किस पर यकीं बोलो करें
यार पंकज तू बता, मैं क्या कहूँ

9 टिप्पणियाँ:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया January 28, 2013 at 9:06 AM  

लिस्ट'लम्बी है हमारे दर्द की ,
और कितनों ने ठगा,मैं क्या कहूँ,,,

वाह वाह !!! बहुत उम्दा गजल,,,पंकज जी,,

recent post: कैसा,यह गणतंत्र हमारा,

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) January 28, 2013 at 9:35 AM  

प्रभावशाली ,
जारी रहें।

शुभकामना !!!

आर्यावर्त
आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

ई. प्रदीप कुमार साहनी January 28, 2013 at 10:13 AM  

आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (30-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

Yashwant Mathur January 28, 2013 at 11:35 PM  

बहुत ही बढ़िया सर!


सादर

संगीता स्वरुप ( गीत ) January 30, 2013 at 1:45 AM  

बहुत खूब ...

Brijesh Singh February 2, 2013 at 6:22 PM  

बहुत सुन्दर!
http://voice-brijesh.blogspot.com

expression February 4, 2013 at 6:23 AM  

बहुत बढ़िया ग़ज़ल सर....

सादर
अनु

अभिषेक कुमार अभी May 24, 2014 at 9:26 AM  

आपकी इस उत्कृष्ट अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (25-05-2014) को ''ग़ज़ल को समझ ले वो, फिर इसमें ही ढलता है'' ''चर्चा मंच 1623'' पर भी होगी
--
आप ज़रूर इस ब्लॉग पे नज़र डालें
सादर

आशीष भाई May 25, 2014 at 5:54 AM  

बढ़िया सुंदर लेखन , गिरीश सर धन्यवाद !
Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

सुनिए गिरीश पंकज को

  © Free Blogger Templates Skyblue by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP