''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

पेट को गर ना मिले जब एक दाना दोस्तो..

>> Wednesday, September 4, 2013

पेट को गर ना मिले जब एक दाना दोस्तो
लूटते हैं लोग तब खाना-खज़ाना दोस्तो

है बड़ी ही त्रासदी इस दौर की यह देखिये
मन भले न हो करो हंसना-हंसाना दोस्तो

पास में धेला नहीं था और ना उपहार कुछ
जा नहीं पाए बनाया इक बहाना दोस्तो

हम भी पा जाते बहुत कुछ है मगर अपनी कमी
आ नहीं पाया कभी गोटी बिठाना दोस्तो

रह रहे हम लूटमारों के शहर में इसलिए
लुट ही जाता है यहाँ पर आशियाना दोस्तो

फेसबुक में मित्र बन कर वार जब करने लगा
पड़ गया न चाह कर उसको हटाना दोस्तो

एक दिन हम साथ उनके मुस्करा कर क्या मिले
मिल गया मुद्दा, गढ़ा सबने फसाना दोस्तो

चल रहे हैं हम पुरानी चाल से 'पंकज' यहाँ
और दौड़े जा रहा है ये ज़माना दोस्तो

7 टिप्पणियाँ:

Lalit Chahar September 4, 2013 at 8:09 AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
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आप अभी तक हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {साप्ताहिक चर्चामंच} की चर्चा हम-भी-जिद-के-पक्के-है -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-002 मे शामिल नही हुए क्या.... कृपया पधारें, हम आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आगर आपको चर्चा पसंद आये तो इस साइट में शामिल हों कर आपना योगदान देना ना भूलें।
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jyoti khare September 4, 2013 at 10:13 AM  

रह रहे हम लूटमारों के शहर में इसलिए
लुट ही जाता है यहाँ पर आशियाना दोस्तो------

वर्तमान का सच
उत्कृष्ट प्रस्तुति


आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी पधारें
कब तलक बैठें---

Rajesh Yadav September 4, 2013 at 8:50 PM  

बहुत अच्छी रचना ! बधाई स्वीकार करें !


हिंदी फोरम एग्रीगेटर पर करिए अपने ब्लॉग का प्रचार !

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ September 5, 2013 at 1:01 AM  

क्या बात! वाह!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen September 6, 2013 at 4:38 AM  

वर्तमान सत्य यही है।

Yashwant Yash September 21, 2013 at 5:24 AM  

कल 22/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद!

Onkar September 21, 2013 at 8:58 PM  

सुंदर ग़ज़ल

सुनिए गिरीश पंकज को

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