''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.

सबसे सुन्दर यह साल रहे।

>> Sunday, January 4, 2015


अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे।
वो कल जैसा भी था लेकिन अब कोई नया कमाल रहे।।

कुछ खट्टी -मीठी यादें हैं, ये तो जीवन का हिस्सा है।
है कौन अलग बोलो जग में, सबका ही ऐसा किस्सा है।
जो बीत गया उसको भूलें, अब कोई नया धमाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे.

हमने कितने सपने पाले, वे बेशक अब तक आधे हैं।
लेकिन सब होंगे पूर्ण यहां, अपने भी अटल इरादे हैं।
बस ध्यान रहे पग रुके नहीं, अपनी वो गतिमय चाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे।

हो विश्व मेरा खुशहाल सदा, हिंसा का दानव मर जाये।
हर आतंकी अपने-अपने ईश्वर से थोड़ा-सा डर जाये।
हर आँगन में मुस्कान रहे, रत्ती भर नहीं मलाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे।

समता-ममता का नारा हो, ये पूरा विश्व हमारा हो।
हम हाथ बढ़ाएंगे अपना, अब कोई ना बेचारा हो।
भूखा-प्यासा न हो कोई, सबको ही रोटी-दाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे। .

जनता का राज रहे जग में, जनता की बात सुनी जाये ।
लाठी-गोली न चले कहीं, दुनिया इक ऐसी बुनी जाये।
जो वादे थे, सब पूरे हों, अब कोई नहीं सवाल रहे।।
अपनी सबकी है यही दुआ, सबसे सुन्दर यह साल रहे.।

2 टिप्पणियाँ:

Kavita Rawat January 4, 2015 at 6:01 AM  

नए साल की सुन्दर मनोकामना ..
आपको भी नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएं!

ब्लॉग - चिट्ठा January 14, 2015 at 6:59 AM  

आपके ब्लॉग को ब्लॉग एग्रीगेटर (संकलक) ब्लॉग-चिट्ठा के "साहित्यिक चिट्ठे" कॉलम में शामिल किया गया है। कृपया हमारा मान बढ़ाने के लिए एक बार अवश्य पधारें। सादर …. अभिनन्दन।।

सुनिए गिरीश पंकज को

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