आज वे बंदे हमें ही आँख दिखलाने लगे.....
>> Sunday, June 25, 2023
चंद ऐसे लोग ही हर सिम्त मंडराने लगे
हमने जिनको राह दिखलाई के तुम ऐसे चलो
आज वे बंदे हमें ही आँख दिखलाने लगे
दृष्टि लोगों की अजब धुंधली हुई इस दौर की
इसलिए सिक्के जो खोटे थे वही छाने लगे
राग दरबारी सुना कर के सियासी मंच से
कुछ बड़े चालाक भत्ते और पद पाने लगे
बेच कर के आत्मा को पा गए सम्मान तो
चंद बौने और हलकट भाव अब खाने लगे
क्या पता पिछले जनम में किस तरह के जीव थे
आज वे चमचे बने दरबार में गाने लगे
जो नहीं समझे कभी भी ज़िंदगी का फलसफा
फेसबुक में वे सभी को आज समझाने लगे
@ गिरीश पंकज

