''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
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ग़ज़ल/ सरकार के हाथ तलवार

>> Thursday, June 22, 2023

 हाथ में जिसके यहाँ सरकार देखेंगे

जान लो के हाथ में तलवार देखेंगे


बात करते हैं मसीहा लोकतन्त्तर की

और पीछे खड्ग में कुछ धार देखेंगे


सह नहीं सकते कभी निंदा स्वयं  की वे

ये सियासी हैं महज जयकार देखेंगे


उस बार धोखे में तुम्हारे आ गए थे हम

क्या हमें करना है अब इस बार देखेंगे


याचकों जैसे कभी जो लोग आते थे

बाद में अकसर उन्हें मक्कार देखेंगे


हर तरफ धोखाधड़ी दिखती सियासत में

जाने कब सज्जन यहाँ दो-चार देखेंगे


कुछ अंधेरा देखकर पंकज करेंगे शोर

हम जलाएँ दीप जब अंधियार देखेंगे


@ गिरीश पंकज


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