बहुत संभल कर 'आना' बिटिया
>> Tuesday, April 10, 2012
बहुत संभल कर 'आना' बिटिया
बिगड़ा इधर ज़माना बिटिया
बिगड़ा इधर ज़माना बिटिया
बहलाने वाले है ढेरों
अपनी राह पे जाना बिटिया
पग-पग पर हैं यहाँ छलावे
मन को मत भरमाना बिटिया
नयी हवा में बह मत जाना
अपनी राह बनाना बिटिया
तुम भी हो कल की निर्माता
सबको यह समझाना बिटिया
दादी-नानी की 'पोटलियाँ'
उसको नहीं गुमाना बिटिया
(ब्लॉगर शिखा वार्ष्णेय द्वारा अपनी बेटी के जन्मदिन पर लिखी गयी कविता को पढ़ने के बाद)