''सद्भावना दर्पण'

दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में पुरस्कृत ''सद्भावना दर्पण भारत की लोकप्रिय अनुवाद-पत्रिका है. इसमें भारत एवं विश्व की भाषाओँ एवं बोलियों में भी लिखे जा रहे उत्कृष्ट साहित्य का हिंदी अनुवाद प्रकाशित होता है.गिरीश पंकज के सम्पादन में पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित ''सद्भावना दर्पण'' पढ़ने के लिये अनुवाद-साहित्य में रूचि रखने वाले साथी शुल्क भेज सकते है. .वार्षिक100 रूपए, द्वैवार्षिक- 200 रूपए. ड्राफ्ट या मनीआर्डर के जरिये ही शुल्क भेजें. संपर्क- 28 fst floor, ekatm parisar, rajbandha maidan रायपुर-४९२००१ (छत्तीसगढ़)
&COPY गिरीश पंकज संपादक सदभावना दर्पण. Powered by Blogger.
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ब्लाँग आँफ द मंथ का पुरस्कार

>> Thursday, July 22, 2010

आप की शुभकामनाएं साथ हैं
क्या हुआ गर कुछ बलाएँ साथ है.

हारने का अर्थ यह भी जानिए
जीत की संभावनाएं साथ है

इस अँधेरे को फतह कर लेंगे हम
रौशनी की कुछ कथाएँ साथ है.

आप की शुभकामनाएं साथ हैं 
ये पंक्तियाँ फिर दुहरा रहा हूँ, क्योंकि इसका एक कारण है.
ईटिप्स ब्लाँग टीम ने सूचित किया है,कि मई-2010 के लिये  मेरे ब्लॉग ''गिरीश पंकज'' एवं ,"सदभावना दर्पण" को सामूहिक रुप से ब्लाँग आँफ द मंथ का पुरस्कार दिया गया है. हर महीने की तरह इस बार भी ब्लाँग आँफ द मंथ के पुरस्कारो की घोषणा कर दी गयी है । ब्लाँगर साथियो को उत्साहित करने के लिये पिछले साल शुरू किये गये इस पुरस्कार के अन्तर्गत महीने  के सर्वश्रेठ ब्लाँग को चुनकर उन्हे पुरस्कृत किया जाता है । ब्लाँग चयन के लिये एक समिति "BLOG OF THE MONTH FOUNDATION" बनाई है. पुरस्कार स्वरुप कोई राशि नहीं दी जाती ।
मार्च-2010 के लिये यह आनलाँईन पुरस्कार आपके अपने पसंदीदा ब्लाँग "छीटेँ और बोछारेँ" को दिया जा रहा है। वहीँ अप्रैल-2010 के लिये यह पुरस्कार आपके अपने चहेते ब्लाँग "ग्यान दर्पण" को दिया जा रहा है । इसके शानदार लेखोँ और ब्लाँग जगत मे साक्रिय भागीदारी के लिये ग्यान दर्पण को यह पुरस्कार दिया जा रहा है । वहीँ मई-2010 के लिये यह पुरस्कार मेरे ब्लॉग ''गिरीश पंकज'' एवं ,"सदभावना दर्पण" को सामूहिक रुप से दिया गया है.
कोई भी सही सम्मान रचनात्मक ऊर्जा को बढ़ाता ही है. मुझे बहुत अच्छा लगता है कि कोई सम्मान अचानक मिले. उसके लिये हम जोड़-तोड़ न करे. तभी सार्थकता है. वर्ना आजकल पुरस्कारों का माफिया सरगर्म है. सौभाग्यवश ब्लोग की दुनिया में अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ है. यहाँ अभी भी सही चयन की परम्परा नज़र आ रही है. मैं ईटिप्स द्वारा प्रदत्त सम्मान को सगर्व ग्रहण करता हूँ. इन पंक्तियों के साथ, कि ''आप की शुभकामनाएं साथ हैं''

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सुनिए गिरीश पंकज को

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