ग़ज़ल/ सरकार के हाथ तलवार
>> Thursday, June 22, 2023
हाथ में जिसके यहाँ सरकार देखेंगे
जान लो के हाथ में तलवार देखेंगे
बात करते हैं मसीहा लोकतन्त्तर की
और पीछे खड्ग में कुछ धार देखेंगे
सह नहीं सकते कभी निंदा स्वयं की वे
ये सियासी हैं महज जयकार देखेंगे
उस बार धोखे में तुम्हारे आ गए थे हम
क्या हमें करना है अब इस बार देखेंगे
याचकों जैसे कभी जो लोग आते थे
बाद में अकसर उन्हें मक्कार देखेंगे
हर तरफ धोखाधड़ी दिखती सियासत में
जाने कब सज्जन यहाँ दो-चार देखेंगे
कुछ अंधेरा देखकर पंकज करेंगे शोर
हम जलाएँ दीप जब अंधियार देखेंगे
@ गिरीश पंकज